स्कूल की फीस में 3.15 लाख के गबन का आरोप : कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज
Wed, Sep 23, 2026
क्लर्क पर हिसाब न देने और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप
उन्नाव। स्कूल में बच्चों से जमा कराई गई फीस का हिसाब मांगना प्रबंधक को भारी पड़ गया। करीब 3.15 लाख रुपये की फीस का हिसाब नहीं मिलने के बाद मामला पुलिस से होते हुए कोर्ट तक पहुंच गया। कोर्ट के आदेश पर कोतवाली सदर पुलिस ने स्कूल के क्लर्क कन्हैया लाल वर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। प्रबंधक ने फीस की रकम में गड़बड़ी और हिसाब नहीं देने का आरोप लगाया है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है।आदर्श नगर निवासी राजेंद्र प्रसाद वर्मा ने कोर्ट में दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि वह गदनखेड़ा-कौशिल्यापुरम स्थित महावीर प्रसाद जनक दुलारी पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रबंधक हैं। उनके मुताबिक, कन्हैया लाल वर्मा को 9 दिसंबर 2024 को स्कूल में क्लर्क के पद पर रखा गया था। क्लर्क के जिम्मे विद्यार्थियों से फीस जमा कराने के साथ ही स्कूल के आय-व्यय और अन्य लेखा-जोखा का काम भी था। प्रबंधक का आरोप है कि इसी दौरान स्कूल में जमा फीस की 3,15,905 रुपये की रकम का हिसाब नहीं मिल पाया। कई बार जानकारी मांगने के बावजूद संबंधित क्लर्क की ओर से रकम का स्पष्ट ब्योरा नहीं दिया गया। इसके बाद उसने स्कूल आना भी बंद कर दिया।
पहले थाने में बुलाया गया, 15 दिन का समय मांगा
प्रबंधक के अनुसार, मामले की शिकायत पहले कोतवाली पुलिस से की गई थी। पुलिस ने कन्हैया लाल को थाने बुलाकर पूछताछ की। इस दौरान उसने कथित तौर पर एक समझौता पत्र देकर पूरा हिसाब देने के लिए 15 दिन का समय मांगा था। आरोप है कि तय समय बीतने के बाद भी न तो स्कूल को रकम का हिसाब दिया गया और न ही विवादित धनराशि वापस की गई।
घर जाकर हिसाब मांगने पर विवाद का आरोप
प्रार्थनापत्र में राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि 10 दिसंबर 2025 की शाम करीब पांच बजे वह कन्हैया लाल के घर पहुंचे थे। मकसद स्कूल के हिसाब और उसके स्कूल नहीं आने की वजह पूछना था। आरोप है कि बातचीत के दौरान कन्हैया लाल नाराज हो गया और गाली-गलौज करते हुए दोबारा रुपये मांगने पर जान से मारने की धमकी दी। प्रबंधक का यह भी आरोप है कि बाद में फोन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी। परिवार की ओर से भी उसके बाहर होने की जानकारी दी जाती रही।
कई जगह शिकायत के बाद कोर्ट की शरण
रकम का हिसाब और वापसी नहीं होने पर प्रबंधक ने पुलिस अधीक्षक के साथ जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की। इसके बावजूद रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया। कोर्ट के आदेश के बाद कोतवाली सदर पुलिस ने आरोपी क्लर्क के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली।पुलिस अब स्कूल के फीस रिकॉर्ड, जमा रकम और दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते समेत अन्य दस्तावेजों की जांच करेगी। जांच के बाद आरोपों की वास्तविक स्थिति साफ होगी।
फर्जी वीजा-टिकट देकर विदेश भेजने का झांसा : 1.70 लाख ठगे
Wed, Sep 23, 2026
नौकरी के नाम पर युवक को दिए मेडिकल और यात्रा के दस्तावेज, चेक भी हुई बाउंस; कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज
उन्नाव। विदेश में नौकरी लगवाने के नाम पर युवक से 1.70 लाख रुपये लेने के बाद उसे फर्जी वीजा, मेडिकल सर्टिफिकेट और फ्लाइट टिकट थमाने का मामला सामने आया है। रुपये वापस मांगने पर युवक को 1.70 लाख रुपये की चेक दी गई, लेकिन वह भी बाउंस हो गई। पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के आदेश पर कोतवाली सदर पुलिस ने रुस्तमपुर सरोसी निवासी संजय यादव और उसके तीन-चार अज्ञात साथियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की है।
दस्तावेज देखकर युवक को हुआ शक
अचलगंज थाना क्षेत्र के बेहटा नथई सिंह निवासी कुलदीप सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि संजय यादव ने उसे विदेश में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। नौकरी के लिए उससे अलग-अलग प्रक्रिया के नाम पर कुल 1.70 लाख रुपये लिए गए। इसके बाद आरोपी की ओर से उसे मेडिकल सर्टिफिकेट, वीजा और फ्लाइट टिकट उपलब्ध कराए गए।कुलदीप के अनुसार, कुछ समय बाद उसे इन दस्तावेजों के फर्जी होने की जानकारी हुई। इसके बाद उसने विदेश जाने के बजाय अपने रुपये वापस मांगे। आरोप है कि आरोपी काफी समय तक रुपये लौटाने के नाम पर उसे टालता रहा।
रुपये लौटाने के लिए दी चेक भी नहीं हुई पास
शिकायत के मुताबिक, लगातार रुपये मांगने के बाद आरोपी ने कुल 1.70 लाख रुपये की चेक दी। कुलदीप ने चेक बैंक में लगाई तो वह बाउंस हो गई। इसके बाद जब उसने आरोपी को चेक के भुगतान न होने की जानकारी दी तो दोनों के बीच विवाद हो गया। पीड़ित ने यह घटना शेखपुर नहर के पास होने की बात पुलिस को बताई है।
पहले थाने, फिर जनसुनवाई और एसपी से शिकायत
कुलदीप का कहना है कि उसने मामले की शिकायत 9 जून को कोतवाली सदर में की थी। इसके बाद 15 जून को जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। 17 जून को पुलिस अधीक्षक को प्रार्थनापत्र देने के साथ ही रजिस्टर्ड डाक से भी शिकायत भेजी गई। इसके बावजूद रिपोर्ट दर्ज न होने पर उसने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया।
दूसरे युवकों को भी फंसाने का आरोप
पीड़ित ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि आरोपी विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवकों से संपर्क करता है। आरोप है कि पासपोर्ट और दूसरे जरूरी दस्तावेज लेने के बाद उनसे रुपये मांगे जाते हैं। कुलदीप ने मामले में आरोपी के साथ अन्य लोगों के शामिल होने की आशंका भी जताई है। पुलिस अब दर्ज मुकदमे के आधार पर आरोपों की जांच करेगी और दस्तावेजों की वास्तविकता समेत रुपये के लेनदेन की जानकारी जुटाएगी।
प्लांट में घंटों खड़े रहते हैं ट्रक : चालकों ने उठाए व्यवस्था पर सवाल
Wed, Sep 23, 2026
दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में चालकों का विरोध, बोले- लोडिंग के बाद भी नहीं निकलने दिया जाता बाहर
उन्नाव। दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम के बॉटलिंग प्लांट में बुधवार को ट्रक चालकों के विरोध के चलते व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए। चालकों का कहना है कि लोडिंग के लिए प्लांट पहुंचने के बाद उन्हें कई घंटे परिसर में ही रोक दिया जाता है। इससे न सिर्फ उन्हें परेशानी होती है, बल्कि ट्रकों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। चालकों ने अपनी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर विरोध जताया। यह प्लांट जिले के साथ आसपास के कई जिलों की गैस सप्लाई के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यहां से लखनऊ, हरदोई, फतेहपुर, कानपुर, कानपुर देहात समेत 30 से ज्यादा जिलों की गैस एजेंसियों तक घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडर भेजे जाते हैं। चालकों के मुताबिक रोज बड़ी संख्या में ट्रक यहां से सिलेंडर लेकर अलग-अलग जिलों के लिए रवाना होते हैं। ऐसे में प्लांट के अंदर ट्रकों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।
सुबह पहुंचने के बाद शाम तक परिसर में रहने का आरोप
विरोध कर रहे चालकों का कहना है कि वे सुबह करीब छह बजे ट्रक लेकर प्लांट पहुंचते हैं। लोडिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कई बार उन्हें तत्काल बाहर नहीं निकलने दिया जाता। आरोप है कि गेट बंद कर दिए जाने के कारण चालक चाय-पानी या भोजन जैसी जरूरतों के लिए भी बाहर नहीं जा पाते। चालकों का कहना है कि कई बार शाम तक परिसर में ही रहना पड़ता है। धरने में शामिल चालक सुहरलाल ने बताया कि उनकी मुख्य मांग यही है कि लोडिंग पूरी होने के बाद ट्रकों को पहले की तरह बाहर जाने दिया जाए। उनका कहना है कि चालक कई घंटे वाहन में रहते हैं और इस दौरान उन्हें जरूरी कामों के लिए भी परेशानी होती है।
एजेंसी में पहले से सिलेंडर, फिर भेजे गए कई ट्रक
चालकों ने गैस एजेंसियों तक ट्रकों के भेजे जाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उनका आरोप है कि मंगलवार को लखनऊ की एक गैस एजेंसी के लिए लगातार नौ ट्रक भेजे गए। वहां पहुंचने के बाद चालकों को जानकारी हुई कि एजेंसी में पहले से करीब एक हजार सिलेंडर मौजूद थे और खाली सिलेंडरों की भी उपलब्धता नहीं थी। चालकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में ट्रक लेकर लंबी दूरी तय करने के बाद उन्हें बेवजह इंतजार करना पड़ता है। इससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती है। उनका कहना है कि एजेंसियों की वास्तविक जरूरत के हिसाब से ट्रकों को भेजने की व्यवस्था होनी चाहिए।
सड़क पर ट्रक खड़ा करें तो चालान, प्लांट में पार्किंग नहीं
चालकों ने प्लांट के बाहर ट्रकों की पार्किंग को लेकर भी समस्या बताई। उनका कहना है कि प्लांट के अंदर पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से कई बार वाहनों को सड़क किनारे खड़ा करना पड़ता है। सड़क किनारे वाहन खड़े करने पर आरटीओ या प्रशासन की कार्रवाई और चालान का डर बना रहता है। चालकों का कहना है कि यदि प्लांट में वाहनों के लिए पर्याप्त जगह निर्धारित कर दी जाए तो उन्हें सड़क पर ट्रक खड़ा करने की मजबूरी नहीं रहेगी। इससे यातायात व्यवस्था भी प्रभावित नहीं होगी।
अधिकारियों के व्यवहार पर भी नाराजगी
विरोध कर रहे चालकों ने प्लांट के कुछ अधिकारियों के व्यवहार पर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि समस्याएं बताने पर कई बार उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ सख्त या बदतमीजी से बात की जाती है। चालकों का कहना है कि वे लंबे समय से इन समस्याओं को उठा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो पाया। चालकों के मुताबिक बुधवार को मौके पर करीब 250 से 300 चालक मौजूद रहे और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया।
अधिकारियों ने कहा, प्लांट में काम सामान्य
उधर, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के प्लांट अधिकारियों ने चालकों की हड़ताल की बात से इनकार किया। अधिकारियों का कहना है कि प्लांट की गतिविधियां सामान्य रूप से चल रही हैं। कुछ चालकों की ओर से अफवाह फैलाकर माहौल खराब करने की बात भी अधिकारियों ने कही। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच प्लांट से सिलेंडरों की आपूर्ति पर कितना वास्तविक असर पड़ा है, इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। हालांकि, बड़ी संख्या में ट्रकों की आवाजाही वाले इस प्लांट में चालकों की ओर से उठाए गए पार्किंग, प्रवेश-निकास और एजेंसियों तक लोड भेजने से जुड़े सवालों ने व्यवस्था पर जरूर चर्चा शुरू कर दी है।