: सात साल से अधर में लटक रही 264 करोड़ की अमृत योजना
Thu, Sep 18, 2025
नगर पालिका ने लीकेज का हवाला देकर खारिज किया जलनिगम का प्रस्ताव, केवल दो जोन लेने को तैयार
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। उन्नाव। शुद्ध पानी का सपना देखने वाले शहरवासियों को अमृत योजना की हकीकत अब तक केवल अधूरे वादों तक सीमित है। 264 करोड़ की लागत से बनी यह योजना सात साल बाद भी अधर में लटकी हुई है। तय समय सीमा बीतने के डेढ़ महीने बाद भी लोगों को नलों से शुद्ध जल नहीं मिल पा रहा।काम पूरा बताने वाले जलनिगम के दावों की पोल टेस्टिंग के दौरान ही खुल गई, जब महज एक महीने में 37 जगह पाइप लाइनें फूट गईं। नगर पालिका ने जिम्मेदारी लेने से इंकार करते हुए साफ कहा कि केवल दो जोन ही संतोषजनक पाए गए हैं और वह भी शर्त के साथ। गली-कूचों में खोदी गई सड़कें, जगह-जगह पड़े गड्ढे और बार-बार लीकेज ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। छह साल से रेंग रही परियोजना से शहरवासियों का भरोसा डगमगा गया है। निर्माण एजेंसी पर तीन बार जुर्माना लगाने के बाद भी काम की रफ्तार नहीं बदली। लगातार डेडलाइन बढ़ाने के बावजूद योजना की तस्वीर जस की तस है। शहर के 32 वार्डों के 30,298 घरों में अब तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का सपना अधूरा है। सात साल बाद भी योजना का भविष्य अधर में लटका है और आम लोगों की प्यास ट्यूबवेलों से ही बुझ रही है।
सात जोन पूरे बताए, टेस्टिंग में 37 जगह फूटे पाइप
जलनिगम का दावा है कि शहर के दस में से सात जोन का काम पूरा हो चुका है और तीन जोन अंतिम चरण में हैं। मार्च में सात जोन नगर पालिका को सौंपने की प्रक्रिया भी शुरू हुई। लेकिन टेस्टिंग के दौरान केवल एक महीने में ही 37 जगह पाइपलाइनें फट गईं। इसके बाद नगर पालिका ने जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार कर दिया।
केवल दो जोन पर बनी सहमति
नगर पालिका का कहना है कि केवल दो जोन (जोन-6 शेखपुर और जोन-7 अकरमपुर) ही 90 फीसदी संतोषजनक पाए गए हैं। इनकी जिम्मेदारी भी तभी ली जाएगी जब जल निगम या निर्माण एजेंसी एक साल तक रखरखाव की गारंटी दे।
जांच टीम ने खामियां उजागर कीं
डीएम गौरांग राठी ने मामले की गंभीरता देखते हुए एडीएम न्यायिक अमिताभ यादव की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम बनाई थी। इस टीम ने पहले चरण में चार जोन (शेखपुर, अकरमपुर, सिविल लाइंस और लोकनगर बंदूहार) की जांच कर खामियों को चिह्नित किया। जल निगम ने सुधार का दावा किया, लेकिन सिविल लाइंस क्षेत्र में अब भी कई जगह पाइप लाइनें लीक हो रही हैं।
सात साल से रेंग रही योजना
दिसंबर 2018 में योजना की शुरुआत हुई थी और जून 2020 तक काम पूरा होना था। लेकिन डेडलाइन बार-बार बढ़ती रही—मार्च 2021, नवंबर 2021, जुलाई 2022, जनवरी 2023, मार्च 2023, अगस्त 2023, दिसंबर 2023, मार्च 2024, अक्टूबर 2024, नवंबर 2024, मार्च 2025 और फिर जुलाई 2025 तक। 13 बार समय सीमा बढ़ने के बाद भी परियोजना अधूरी है।
तीन बार जुर्माना, फिर भी लापरवाही
निर्माण एजेंसी की लापरवाही पर जल निगम ने अब तक तीन बार जुर्माना लगाया है।
जून 2023 में सड़कों की मरम्मत न कराने और गलत रिपोर्ट देने पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना।
नवंबर 2023 में लेटलतीफी को लेकर 5.50 करोड़ रुपये का जुर्माना।
सितंबर 2024 में काम में देरी पर 5.90 करोड़ रुपये का जुर्माना।
कुल मिलाकर 12.40 करोड़ का दंड लग चुका है, लेकिन एजेंसी की रफ्तार अब भी सुस्त है।
नगर पालिका ने जताई कड़ी आपत्ति, निगम ने बताया काम लगभग पूरा
नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा ने कहा कि पाइप लाइनें रोज कहीं न कहीं फूट जाती हैं। नगर पालिका लगातार कुछ महीने जलापूर्ति होते देखेगी तभी जिम्मेदारी लेगी। अभी केवल दो जोन ही लेने को तैयार हैं, वह भी शर्त के साथ कि एक साल तक रखरखाव जल निगम या निर्माण एजेंसी करे।
नगरपालिका ईओ एसके गौतम ने बताया कि एक-डेढ़ साल से टेस्टिंग हो रही है, लेकिन निर्बाध जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। अभी नगर पालिका के 24 ट्यूबवेल ही पानी की सप्लाई कर रहे हैं। जिन जोन में लीकेज पूरी तरह खत्म हो गए हैं केवल उन्हीं की जिम्मेदारी ली जाएगी। हमारे पास रखरखाव का बजट नहीं है।
जलनिगम एक्सईएन पंकज रंजन झा ने बताया कि शहर के दस में सात जोन पूरे हो चुके हैं। टेस्टिंग के दौरान आने वाली समस्याओं को ठीक करा दिया गया है। चार जोन नगर पालिका को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। बाकी जोन भी जल्द पूरे कर दिए जाएंगे।
: यूपी के हाथरस में भोजन नहीं दिया तो पड़ गई अपनी जान गवानी; युवक ने धारदार हथियार से कर दी थी वृद्ध की हत्या!
Wed, Sep 17, 2025
यूपी के हाथरस में भोजन नहीं दिया तो पड़ गई अपनी जान गवानी; युवक ने धारदार हथियार से कर दी थी वृद्ध की हत्या!
उत्तर प्रदेश हाथरस : दरअसल जनपद के चंदपा कोतवली क्षेत्र के गांव केवलगढ़ी में हुई वृद्ध की हत्या का राज खुल गया है, पुलिस ने हत्या करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है, उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया गया है, पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि उसे भोजन के बदले उस दिन गाली खाने को मिली थी, इसलिए उसे मौत के घाट उतार दिया. इस खुलासे के बाद गांव के लोग भी हैरान हैंजानकारी के मुताबिक, 13 सितंबर 2025 को हरिओम उपाध्याय पुत्र स्व. डोरीलाल उपाध्याय (75) निवासी गांव केवलगढ़ी, थाना चंदपा, जनपद हाथरस ने तहरीर पिता की हत्या की तहरीर दी थी, हरिओम उपाध्याय ने तहरीर में बताया कि पिता डोरीलाल उपाध्याय की ट्यूबवेल पर सोते समय हत्या कर दी गई. शव वहीं खेत पर पड़ा मिला था. चंदपा कोतवली में यह मुकदमा दर्ज किया गया थापुलिस अधीक्षक हाथरस और अपर पुलिस अधीक्षक हाथरस द्वारा घटना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके पर पहुंचकर फॉरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया गया. पुलिस अधीक्षक ने हत्याकांड के खुलासे के लिए सीओ सादाबाद के लीडरशिप में टीमों का गठन किया.एसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा द्वारा गठित टीमों के प्रयास से 16 सितंबर 2025 को एंटी थेफ्ट टीम और थाना चंदपा पुलिस की संयुक्त कार्रावई में डोरीलाल की हत्या करने वाले अभियुक्त किशनपाल कश्यप उर्फ किस्सू पुत्र स्व. श्रीपाल कश्यप निवासी, गांव केवलगढ़ी, कोतवली चंदपा को नगला भुस तिराहे के पास से गिरफ्तार किया गया, इसकी निशादेही से हत्या में इस्तेमाल लोहे का बल्लम बरामद हुआ अपर पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार सिंह ने बताया की डोरीलाल (75) की 12/13 सितंबर को केवलगढ़ी में धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी. 16 सितंबर को अभियुक्त किशनपाल निवासी केवलगढ़ी को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि वह डोरीलाल को बचपन से जानता था.वह उनके खेत की रखवाली करता था, जिसके बदले वह पैसा नहीं देते थे, सिर्फ खाना ही देते थे. उस रात उसने उनसे खाना मांगा तो वह गाली-गलौज करने लगे. तब उसने गुस्से में आकर बल्लम से उनकी हत्या कर दी, अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है!
: सात साल में ही बेकार हुआ 62 करोड़ का गंगा पुल
Wed, Sep 17, 2025
बीघापुर-कानपुर को जोड़ने वाला मार्ग पूरी तरह कटा, पीडब्ल्यूडी ने बंद कराया आवागमन
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
उन्नाव। बीघापुर तहसील को कानपुर के महराजपुर से जोड़ने वाला गंगा नदी पर बना पुल सात साल में ही अनुपयोगी हो गया। रविवार को पहुंच मार्ग नदी में समा जाने के बाद पीडब्ल्यूडी ने पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया।
वर्ष 2018 में 62.91 करोड़ की लागत से एक किमी लंबा पुल तैयार हुआ था। शुरुआत से ही कानपुर छोर की ओर नदी का रुख बदलने लगा और डोमनपुरवा गांव के पास रेत जमने लगी। नतीजतन पुल के नीचे आधे हिस्से में पानी का बहाव रुक गया और दूसरी तरफ कटान तेज हो गया। तीन साल पहले ही बीघापुर की तरफ का पहुंच मार्ग बह गया था, जिसमें किसानों की करीब 100 बीघा जमीन भी नदी में समा गई थी। तब पीडब्ल्यूडी ने अस्थायी वैकल्पिक रास्ता बनाकर केवल पैदल और दोपहिया वाहनों को राहत दी थी।
कटान रोकने के उपाय अधूरे
2021 में शासन ने अप्रोच रोड दोबारा बनाने के लिए 4.20 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। तकनीकी टीम ने पुल से 500 मीटर की दूरी पर दोनों किनारों पर मजबूत कंक्रीट की दीवार (बंड वॉल) बनाने का सुझाव दिया था। इस पर करीब 30 करोड़ की लागत आती, लेकिन बजट न मिलने से काम अधर में लटक गया।
आईआईटी की सलाह – पुल की लंबाई बढ़ाई जाए
इधर, मार्च 2025 में पीडब्ल्यूडी ने बनारस आईआईटी की टीम से सर्वे कराया। प्रोफेसर पीके दीक्षित की रिपोर्ट में बताया गया कि गंगा की धारा कभी उन्नाव की ओर और कभी कानपुर की ओर कटान करती है। ऐसे में पुल को सुरक्षित रखने के लिए इसकी लंबाई एक किलोमीटर और बढ़ानी होगी।
पीडब्ल्यूडी एक्सईएन हरदयाल अहिरवार ने बताया कि बीघापुर की तरफ की अप्रोच रोड कटने के बाद अब कानपुर छोर डोमनपुरवा गांव के पास भी सड़क कट रही है। इससे पुल बंद करना पड़ा। बनारस आईआईटी की रिपोर्ट के आधार पर पुल की लंबाई बढ़ाने के लिए सेतु निगम से एस्टीमेट तैयार कराया जा रहा है। उच्चाधिकारियों की स्वीकृति और बजट मिलने के बाद काम शुरू होगा।