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बिन्दकी में दावत-ए-इस्लामी के मदरसों में : 05 बच्चों ने किया हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन मुकम्मल, 11 ने पूरा किया नाज़रा।

THE LUCKNOW TIMES

Thu, Feb 12, 2026
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फतेहपुर बिन्दकी। दावत-ए-इस्लामी इंडिया के तहत बिन्दकी में संचालित पार्ट टाइम मदरसे फ़ैज़ान-ए-वारिस-ए-पाक और फ़ैज़ान-ए-गरीब नवाज़ में उस समय खुशी और रूहानी माहौल देखने को मिला जब पाँच बच्चों ने हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन मुकम्मल किया और ग्यारह बच्चों ने नाज़रा क़ुरआन पूरा कर सम्मान प्राप्त किया।

यह कार्यक्रम बुधवार की रात बिन्दकी नगर के मोहल्ला कजियाना, निजामी चौराहे पर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर बिहार से पधारे आलिम-ए-दीन मौलाना सलाहुद्दीन मदनी साहब ने ख़ुसूसी बयान में क़ुरआन-ए-पाक की अहमियत बयान करते हुए कहा कि यह इंसान को सही और सच्ची राह दिखाने वाली किताब है।

उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी मसाला, गुटखा, गाली-गलौज, जुए, शराबनोशी और अन्य बुराइयों में फंसकर अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर रही है। जरूरत इस बात की है कि नौजवान हुज़ूर अक़दस सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के नक्शे-कदम पर चलें और उनकी सादगी, ईमानदारी, रहमत और अख़लाक़ को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि इस्लाम में इबादत केवल नमाज़ और रोज़ा तक सीमित नहीं, बल्कि ग़रीबों की मदद करना, उन्हें खाना खिलाना, रास्ते से तकलीफ़देह चीज़ हटाना, पड़ोसियों का ख़याल रखना, बुज़ुर्गों का सम्मान और छोटों पर शफ़क़त करना भी इबादत है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि केवल इज्तिमा व जलसों में बैठकर ज्ञान देना पर्याप्त नहीं, बल्कि उस शिक्षा को अपने आचरण में शामिल करना ही असली मकसद है।

अंत में देश में अमन-शांति, भाईचारे और खुशहाली के लिए दुआ-ए-ख़ैर की गई। कार्यक्रम की सरपरस्ती अब्दुल क़य्यूम भाई और डॉ. मुकीम साहब ने की। आयोजनकर्ता जनाब नसीर अहमद एवं ज़िला निगरान जनाब नासिर अहमद की उपस्थिति ने कार्यक्रम को मजबूती प्रदान की।

बच्चों के उस्ताद कारी वसीम अकरम साहब को विशेष रूप से सराहा गया, जिनकी मेहनत से बच्चों ने हिफ़्ज़ और नाज़रा मुकम्मल किया। हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन मुकम्मल करने वालों में हाफ़िज़ आशियान पुत्र अकील अहमद (वारसी नगर), मोहसिन पुत्र ननकू शेख (वारसी नगर), आक़िब पुत्र अतीक अहमद (मुग़लाही), हुज़ैफ़ा पुत्र वहीद खान (मुग़लाही) और वसीम पुत्र अब्दुल हसन (वारसी नगर) शामिल रहे। इसके अतिरिक्त ग्यारह बच्चों को नाज़रा क़ुरआन पूरा करने पर प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।

यह कार्यक्रम समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश बनकर सामने आया कि यदि नई पीढ़ी को सही दिशा और दीनी तालीम दी जाए तो वह बुराइयों से दूर रहकर एक आदर्श और सफल जीवन जी सकती है।

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