सरकारी धन में सेंध : एमआरएस इंटर कॉलेज में 3.01 करोड़ के गबन पर एफआईआर, पांच कर्मचारी नामजद
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Wed, Jun 10, 2026
वर्षो से चल रही थी वित्तीय अनियमितता; 73 लाख की हो चुकी है रिकवरी
उन्नाव। पुरवा स्थित एमआरएस इंटर कॉलेज में 3.01 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन के मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच कर्मचारियों के खिलाफ सदर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है। आरोपियों में कॉलेज के प्रधान लिपिक, सहायक लिपिक, विभागीय वरिष्ठ सहायक और दो परिचारक शामिल हैं। सभी को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। मामले का खुलासा कॉलेज के सहायक लिपिक राधेश्याम की शिकायत के बाद हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रधान लिपिक अमित कुमार मिश्रा ने अपने खाते के साथ-साथ उनके और दो परिचारकों के खातों में भी अलग-अलग तिथियों में बड़ी धनराशि ट्रांसफर करवाई और बाद में यह कहकर रकम निकलवा ली कि पैसा उनके रिश्तेदार का है। मामला जिलाधिकारी तक पहुंचने पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन और शासकीय धन के दुरुपयोग की पुष्टि हुई। रिपोर्ट के अनुसार प्रधान लिपिक अमित कुमार मिश्रा के विभिन्न खातों में करीब 2.68 करोड़ रुपये स्थानांतरित किए गए। परिचारक विनोद कुमार त्रिपाठी के खाते में छह लाख रुपये से अधिक और सहायक लिपिक राधेश्याम के खाते में करीब ढाई लाख रुपये की अनियमित धनराशि पाई गई।जांच के दौरान डीआईओएस कार्यालय के वरिष्ठ सहायक सागर कपूर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। उन पर अधिकारियों के समक्ष गलत तथ्य प्रस्तुत करने, विभागीय डोंगल का दुरुपयोग करने और धनराशि के हस्तांतरण में सहयोग करने के आरोप लगे हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर सभी संबंधित कर्मचारियों को पहले निलंबित किया गया और अब उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। डीआईओएस सुनील दत्त ने मंगलवार शाम सदर कोतवाली में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शासकीय धन के गबन सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विभागीय जांच के अनुसार यह वित्तीय अनियमितता पिछले चार से पांच वर्षों से जारी थी। गबन की गई धनराशि में से अब तक करीब 73 लाख रुपये राजकोष में जमा कराए जा चुके हैं, जबकि शेष रकम की वसूली के लिए विभागीय और कानूनी कार्रवाई जारी है। जिला विद्यालय निरीक्षक सुनील दत्त ने बताया कि जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई है। संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। अब तक लगभग 73 लाख रुपये की रिकवरी हो चुकी है और शेष धनराशि की वसूली की कार्रवाई जारी है।
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