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शुक्लागंज में पुल निर्माण के लिए चला बुलडोजर : चार और मकान ढहे; मुआवजे को लेकर उठे सवाल

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Mon, Jun 29, 2026
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17 मकान ध्वस्त, 21 पर अभी बाकी कार्रवाई, प्रभावित परिवारों ने प्रशासन पर लगाया अनदेखी का आरोप

उन्नाव। शुक्लागंज की मिश्रा कॉलोनी में नए पुल निर्माण के लिए मकानों को हटाने का अभियान सोमवार को भी जारी रहा। प्रशासन ने पोकलैंड मशीनों की मदद से चार और मकानों को ध्वस्त कर दिया। अब तक कुल 17 मकान गिराए जा चुके हैं, जबकि करीब 21 मकानों पर अभी कार्रवाई बाकी है। इस बीच प्रभावित परिवारों ने मुआवजा न मिलने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है। सोमवार सुबह करीब नौ बजे राजस्व विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण अभियान दोबारा शुरू किया गया। पुल निर्माण की जद में आने वाले मकानों को पहले ही खाली कराया जा चुका था। मोहर्रम के चलते शुक्रवार को अभियान रोक दिया गया था, जिसे शनिवार से फिर शुरू किया गया। हालांकि पोकलैंड मशीनों से कार्रवाई की जा रही है, लेकिन ध्वस्तीकरण की रफ्तार धीमी बनी हुई है। इससे पुल निर्माण से जुड़ी अन्य परियोजनाओं की गति भी प्रभावित हो रही है। लगातार चल रही कार्रवाई के बीच मिश्रा कॉलोनी का बड़ा हिस्सा अब मलबे में तब्दील हो चुका है। इधर, कई प्रभावित परिवारों ने प्रशासन पर मुआवजे में भेदभाव का आरोप लगाया है। स्थानीय निवासी सरस्वती ने बताया कि कुछ लोगों को मुआवजा मिल चुका है, लेकिन उनका परिवार समेत कई अन्य लोग अब भी भुगतान से वंचित हैं। उनका कहना है कि मकान की दीवारों और निर्माण सामग्री तक की लागत नहीं दी गई है। सरस्वती ने बताया कि करीब एक माह पहले उनके पति का निधन हो गया था और अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं पर है। मुआवजे के लिए कई बार आवेदन देने के बावजूद अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उनके पास मकान से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं, हालांकि टैक्स से संबंधित अभिलेख नहीं हैं। अन्य प्रभावितों ने भी यही आरोप दोहराए। उनका कहना है कि विधायक, जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी कार्यालय में कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन अब तक कोई राहत नहीं मिली। लोगों का कहना है कि वर्षों की मेहनत और कर्ज लेकर बनाए गए मकानों के टूटने के बाद अब उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। कुछ प्रभावितों ने मांग की है कि भले ही जमीन का मुआवजा न मिले, लेकिन मकान निर्माण में लगी लागत का भुगतान जरूर किया जाए। एक दिव्यांग पीड़ित ने बताया कि शारीरिक स्थिति के कारण सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना उनके लिए बेहद मुश्किल है। ऐसे में प्रशासन से जल्द न्याय की उम्मीद है।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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