बीएएमएस की डिग्री दिलाने के नाम पर 10 लाख की ठगी : फर्जी दस्तावेज थमाए
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Mon, Aug 17, 2026
डॉक्टर समेत दो लोगों पर धोखाधड़ी और धमकी की रिपोर्ट, जांच में जुटी पुलिस
फर्जी अंकपत्र थमाकर टरकाते रहे आरोपी, चेक भी हुए बाउंस
उन्नाव। बेटे को बीएएमएस की पढ़ाई कराने का सपना एक परिवार के लिए परेशानी का सबब बन गया। आयुर्वेदिक डॉक्टर की पहचान के जरिए मिले एक व्यक्ति ने बीएएमएस की डिग्री दिलाने का भरोसा देकर 10 लाख रुपये ले लिए। काफी समय बीतने के बाद जब डिग्री नहीं मिली तो आरोपी ने पतंजलि विश्वविद्यालय और सीएसजेएम विश्वविद्यालय कानपुर के नाम से अंकपत्र दे दिए। जांच कराने पर दोनों के फर्जी होने की जानकारी हुई। रुपये वापस मांगने पर दिए गए चेक भी बैंक में बाउंस हो गए। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने डॉक्टर समेत दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पत्नी के इलाज के दौरान डॉक्टर से हुई थी पहचान
सदर कोतवाली क्षेत्र के मोतीनगर यूडीए कॉलोनी निवासी जागेलाल ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2022 में वह पत्नी का इलाज कराने अकरमपुर स्थित डॉ. अमित सिंह के आयुर्वेदिक क्लीनिक जाते थे। इसी दौरान डॉक्टर से उनकी अच्छी जान-पहचान हो गई। बातचीत के दौरान डॉक्टर ने उनके बेटे भावेश की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। जागेलाल ने बताया कि बेटा लखनऊ में नीट की तैयारी कर रहा है। आरोप है कि इस पर डॉ. अमित ने उन्हें नीट की तैयारी के बजाय बेटे को बीएएमएस कराने की सलाह दी। डॉक्टर ने बताया कि औरैया के फफूंद थाना क्षेत्र के दहशरा निवासी निर्मल कुमार दुबे से उनकी पहचान है और वह बीएएमएस में दाखिला और डिग्री दिलाने का काम करा सकते हैं।
12 लाख की बात, परिचय के नाम पर 10 लाख में सौदा
जागेलाल के मुताबिक, 17 जुलाई 2022 को उन्हें निर्मल कुमार दुबे से मिलने के लिए बुलाया गया। वहां पहुंचने पर निर्मल डॉक्टर अमित के पास बैठे मिले। आरोप है कि निर्मल ने अपनी ऊंची पहुंच बताते हुए कहा कि यह काम 12 लाख रुपये में होता है, लेकिन डॉक्टर का परिचित होने के कारण 10 लाख रुपये में करा दिया जाएगा। बात तय होने के करीब एक सप्ताह बाद दोनों उनके घर पहुंचे। वहां बेटे के शैक्षिक दस्तावेज और 2.50 लाख रुपये ले लिए गए। बाकी रकम बाद में देने की बात कही गई।
अलग-अलग तारीखों में खाते में भेजे 10 लाख
पीड़ित का आरोप है कि इसके बाद 29 सितंबर 2022, 20 फरवरी 2023 समेत अलग-अलग तारीखों में निर्मल कुमार दुबे के बैंक खाते में आरटीजीएस के जरिए कुल 10 लाख रुपये भेजे गए। रकम लेने के बाद आरोपी काफी समय तक डिग्री के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं देते रहे। हर बार किसी न किसी बहाने से मामला टाल दिया जाता था। काफी दबाव बनाने पर बेटे भावेश के नाम से पतंजलि विश्वविद्यालय और सीएसजेएम विश्वविद्यालय कानपुर के अंकपत्र दिए गए। जागेलाल ने जब इनकी जांच कराई तो दोनों दस्तावेज फर्जी होने की जानकारी सामने आई।
रुपये मांगने पर दिए तीन चेक, सभी हो गए बाउंस
फर्जी दस्तावेज सामने आने के बाद जागेलाल ने दोनों आरोपियों से कानूनी कार्रवाई करने की बात कही और रुपये वापस मांगे। आरोप है कि उन्होंने कुछ दिन में पूरी रकम लौटाने का भरोसा दिया। इसके बाद निर्मल कुमार दुबे ने वर्ष 2024 में अलग-अलग तारीखों के ढाई-ढाई लाख रुपये के तीन चेक दिए। बाकी रकम खाते में भेजने की बात कही गई। पीड़ित ने जब चेक बैंक में लगाए तो तीनों बाउंस हो गए। इसके बाद भी रुपये वापस नहीं मिलने पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
डॉक्टर समेत दो के खिलाफ रिपोर्ट
कोतवाल चंद्रकांत मिश्र ने बताया कि जागेलाल की तहरीर पर डॉ. अमित सिंह और निर्मल कुमार दुबे के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले की जांच की जा रही है। पुलिस आरोपों से जुड़े दस्तावेज, बैंक लेनदेन और विश्वविद्यालयों के अंकपत्रों की भी जांच करेगी।
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