सोना,चेक बाउंस और धमकी : शंख एयरलाइंस के मालिक सरवन विश्वकर्मा पर धोखाधड़ी का परिवाद दर्ज करने का आदेश
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Tue, Jul 7, 2026
सोना गिरवी रखवाकर रकम न दिलाने का आरोप, पुलिस से राहत न मिलने पर पीड़ित पहुंचा था न्यायालय
उन्नाव। शहर के कलेक्टरगंज निवासी एक व्यक्ति के साथ कथित तौर पर 250 ग्राम सोने की धोखाधड़ी के मामले में एससीएसटी विशेष न्यायालय ने बड़ा आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश अंकिता शुक्ला ने शंख एयरलाइंस के मालिक सरवन विश्वकर्मा के खिलाफ परिवाद दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। मामला वर्ष 2017 से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि विश्वास में लेकर सोना गिरवी रखवाया गया, लेकिन न तो धनराशि मिली और न ही सोना वापस किया गया। बाद में दिए गए चेक भी बाउंस हो गए।परिवादी सतीश कुमार ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में दायर प्रार्थना पत्र में बताया कि वर्ष 2017 में सरवन विश्वकर्मा उनके मोहल्ले में रहकर प्लॉटिंग का कारोबार करते थे। इसी दौरान दोनों के बीच परिचय हुआ। सतीश का आरोप है कि सरवन ने उन्हें अधिक धनराशि मिलने का भरोसा देकर 250 ग्राम सोना कानपुर के एक सराफ के यहां गिरवी रखने की सलाह दी। सराफ की ओर से करीब 14 लाख रुपये खाते में जमा कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन न तो रकम मिली और न ही सोने का कोई हिसाब दिया गया। परिवादी का कहना है कि जब उन्होंने अपने सोने और रुपये की मांग की तो काफी समय तक उन्हें टालमटोल किया गया। बाद में सरवन विश्वकर्मा और उनकी मां सुशीला ने सात-सात लाख रुपये के दो चेक दिए। दोनों चेक बैंक में प्रस्तुत किए गए, लेकिन भुगतान न होने के कारण बाउंस हो गए। इसके बाद भी रकम वापस नहीं मिली। सतीश कुमार का आरोप है कि जब उन्होंने लगातार दबाव बनाया तो सरवन विश्वकर्मा अपने परिवार के साथ बिना कोई जानकारी दिए वहां से चले गए। काफी प्रयास के बाद जब उन्हें सरवन का नया पता मिला और वह मिलने पहुंचे तो आरोप है कि उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उन्हें जातिसूचक गालियां दी गईं, मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। परिवादी के अनुसार, उन्होंने 19 सितंबर 2025 को सदर कोतवाली में लिखित शिकायत दी, लेकिन कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद 29 दिसंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक को डाक के माध्यम से शिकायत भेजी, लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस से राहत न मिलने पर उन्होंने एससीएसटी विशेष न्यायालय की शरण ली। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सदर कोतवाली से रिपोर्ट तलब की। पुलिस की ओर से न्यायालय को बताया गया कि आरोपों से संबंधित कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। इसके बाद विशेष न्यायाधीश अंकिता शुक्ला ने प्रस्तुत दस्तावेजों, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक नजीरों का परीक्षण किया। प्रथम दृष्टया आरोपों को सुनवाई योग्य मानते हुए न्यायालय ने सरवन विश्वकर्मा के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश पारित किया। अब इस मामले में न्यायालय की ओर से सरवन विश्वकर्मा को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। मामले की आगे की सुनवाई न्यायालय में निर्धारित तिथि पर होगी। फिलहाल न्यायालय का यह आदेश केवल परिवाद दर्ज करने से संबंधित है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
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