हुसैनगंज के खाली प्लॉट में मिला युवक का शव : पुलिस ने पोस्टमार्टम को भेजा
Tue, Aug 4, 2026
मौत के कारणों पर अभी सस्पेंस, आसपास के लोगों से की पूछताछ
उन्नाव। शहर कोतवाली क्षेत्र के हुसैनगंज मोहल्ले में मंगलवार सुबह उस समय लोगों की भीड़ जुट गई, जब एक खाली प्लॉट में एक युवक का शव पड़ा मिला। सुबह टहलने और आसपास से गुजर रहे लोगों ने शव देखा तो तुरंत पुलिस को सूचना दी। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। सूचना मिलते ही डायल 112 की पीआरवी और शहर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस के मुताबिक, मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे सूचना मिली कि हुसैनगंज में शराब की दुकान के पास स्थित एक खाली प्लॉट में एक व्यक्ति अचेत अवस्था में पड़ा है। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो युवक की मौत हो चुकी थी। इसके बाद घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया और आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई गई। जांच के दौरान मृतक की पहचान मुकीम (35) पुत्र नसीम निवासी हरी मस्जिद, थाना कोतवाली सदर, उन्नाव के रूप में हुई। पहचान होने के बाद पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। कुछ ही देर में परिवार के लोग भी मौके पर पहुंच गए, जिससे माहौल गमगीन हो गया। पुलिस को मृतक के भाई ने बताया कि मुकीम लंबे समय से शराब पीने का आदी था। शुरुआती जांच में मृतक के शरीर पर किसी तरह की बाहरी चोट या संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं। इसके बाद पुलिस ने जरूरी कानूनी कार्रवाई पूरी करते हुए पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।कोतवाली सदर प्रभारी निरीक्षक चंद्रकांत मिश्रा ने बताया कि फिलहाल मौत के कारण स्पष्ट नहीं हैं। वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी। पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। यदि जांच या पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कोई संदिग्ध तथ्य सामने आता है तो उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इलाके में युवक की मौत को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं, हालांकि पुलिस का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के तथ्यों का इंतजार किया जा रहा है।
बैडमिंटन कोर्ट पर चमके जूनियर शटलर : विधायक ने किया सम्मानित
Tue, Aug 4, 2026
खेल से बढ़ता है आत्मविश्वास और अनुशासन : पंकज गुप्ता
उन्नाव। दीनदयाल उपाध्याय स्पोर्ट्स स्टेडियम में मंगलवार को आयोजित योनेक्स-सनराइज यूपी स्टेट सब-जूनियर मेजर बैडमिंटन टूर्नामेंट-2026 की अंडर-13 प्रतियोगिता में खेल प्रतिभाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सदर विधायक पंकज गुप्ता ने खिलाड़ियों से मुलाकात की, उनका उत्साह बढ़ाया और बेहतर प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम की शुरुआत में डिस्ट्रिक्ट बैडमिंटन एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने विधायक का स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे बालक और बालिका खिलाड़ियों से हाथ मिलाकर उनका परिचय लिया और उनके खेल की सराहना की। विधायक ने कहा कि छोटी उम्र में खिलाड़ियों का समर्पण और मेहनत यह बताती है कि भविष्य में यही बच्चे प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का जरिया नहीं है, बल्कि यह बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम के साथ मिलकर काम करने की सोच विकसित करता है। नियमित खेल गतिविधियों से शारीरिक और मानसिक विकास भी बेहतर होता है। ऐसे आयोजन नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मंच देते हैं और उनमें बड़े स्तर पर खेलने का आत्मविश्वास पैदा करते हैं। विधायक ने खिलाड़ियों से कहा कि जीत और हार खेल का हिस्सा है। सबसे जरूरी बात यह है कि खिलाड़ी पूरी ईमानदारी, मेहनत और खेल भावना के साथ मैदान में उतरें। लगातार अभ्यास करने वाले खिलाड़ी ही आगे चलकर बड़ी सफलताएं हासिल करते हैं। प्रतियोगिता के समापन पर विधायक पंकज गुप्ता ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रमाणपत्र और मेमेंटो देकर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान उन्होंने आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों और प्रशिक्षकों की भी सराहना करते हुए कहा कि ऐसे खेल आयोजनों से जिले में नई खेल प्रतिभाओं को पहचान मिल रही है। कार्यक्रम में डिस्ट्रिक्ट बैडमिंटन एसोसिएशन के पदाधिकारी, नवीन सिन्हा, प्रशिक्षक, खिलाड़ी, अभिभावक और बड़ी संख्या में खेल प्रेमी मौजूद रहे।
डिजिटल ग्रीन का 'फार्मरचैट 2.0 : भारत के 10 लाख किसानों का नया डिजिटल साथी
Tue, Aug 4, 2026
लखनऊ
: खेती-किसानी की दुनिया में तकनीक अब वह कमाल कर रही है, जिसकी कुछ साल पहले कल्पना करना भी मुश्किल था। अक्टूबर 2024 में शुरू हुआ डिजिटल ग्रीन इंडिया का एआई आधारित फार्मिंग एडवाइजरी असिस्टेंट 'फार्मरचैट' आज देश के 10 लाख से अधिक किसानों का भरोसा बन चुका है। इसी सफर को और आगे बढ़ाते हुए संस्था ने इसका अत्याधुनिक और स्मार्ट वर्जन 'फार्मरचैट 2.0' लॉन्च कर दिया है, जिसे खास तौर पर ग्रामीण इलाकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
पारंपरिक रूप से देश के छोटे किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही समय पर सही सलाह मिलने की रही है। जानकारी कई बार होती है, लेकिन जब खेती में कोई फैसला लेना होता है, तब वह वक्त पर किसान तक नहीं पहुँच पाती। इसी खाई को पाटने के लिए इस एआई ऐप को पांच अलग-अलग भारतीय भाषाओं में उतारा गया है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए किसानों को लंबा-चौड़ा टाइप करने की जरूरत नहीं पड़ती। वे बोलकर, लिखकर या सीधे अपने खेत की फसल की फोटो खींचकर सवाल पूछ सकते हैं। कम पढ़े-लिखे किसानों के लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है।
इस ऐप के पीछे सिर्फ एक एल्गोरिदम काम नहीं कर रहा, बल्कि इसमें फाइन-ट्यून लैंग्वेज मॉडल, रिट्रीवल-ऑगमेंटेड जनरेशन (आरएजी) और रिइन्फोर्समेंट लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल हैं। सबसे खास बात यह है कि इस पर मिलने वाली हर सलाह की स्थानीय कृषि विशेषज्ञ और पशु चिकित्सक नियमित रूप से जाँच करते हैं, जिससे किसानों को मिलने वाली जानकारी 100 प्रतिशत भरोसेमंद और उनके इलाके की मिट्टी-मौसम के अनुकूल होती है।
यह तकनीक न सिर्फ असरदार है, बल्कि बेहद किफायती भी है। जहाँ पहले पारंपरिक तरीकों से एक किसान को सालभर सलाह देने में करीब 3,300 रुपये का खर्च आता था, वहीं डिजिटल ग्रीन के इस एआई मॉडल ने इस खर्च को घटाकर मात्र 33 रुपये प्रति किसान सालाना पर ला खड़ा किया है। यही वजह है कि अब तक इस प्लेटफॉर्म पर 30 लाख से अधिक सवालों के सटीक जवाब दिए जा चुके हैं और इसके करीब 45 प्रतिशत यूजर्स महिला किसान हैं। 60 डेसिबल्स और आईडीइनसाइट की स्वतंत्र स्टडीज भी यह गवाही देती हैं कि इस ऐप से जुड़ने वाले करीब 60 से 67 प्रतिशत किसान इस पर मिलने वाली सलाह को अपने खेतों में अपनाते हैं, जिससे उनके कृषि संबंधी फैसले लेने का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है।
किसानों के अनुभव और उनकी प्रतिक्रियाओं के आधार पर ही नए 'फार्मरचैट 2.0' को बेहद सरल और सहज इंटरफेस के साथ ढाला गया है। अब यह ऐप किसान के सवाल पूछने का इंतजार नहीं करता, बल्कि उनकी फसल, लोकेशन और मौसम के हिसाब से खुद-ब-खुद जरूरी सुझाव और एडवाइजरी कार्ड्स सामने ले आता है। किसान की पिछली बातचीत और जरूरतों के आधार पर इसकी प्रोफाइल लगातार अपडेट होती रहती है, ताकि उसे हर बार सबसे सटीक समाधान मिल सके।
डिजिटल ग्रीन इंडिया की सीईओ निधि भसीन का कहना है कि इस नए वर्जन का हर एक बदलाव सीधे तौर पर किसानों की राय पर आधारित है। किसानों को हमेशा से अपनी भाषा, अपने मौसम और अपनी स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक सटीक सलाह चाहिए थी, जो उन्हें रोजमर्रा की बातचीत की तरह मिल सके। संस्था यहीं नहीं रुकने वाली, बल्कि इसका अगला कदम 'एग्रीकल्चरल एआई हार्नेस' लॉन्च करना है, जिसके जरिए खेती की सलाह, मौसम की सटीक जानकारी, बाजार के भाव और सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही छत के नीचे मिल सकेगा। साल 2028 तक इस मुहिम से 35 लाख और नए किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जो देश के कृषि क्षेत्र में एक शांत और मजबूत डिजिटल क्रांति की इबारत लिख रहा है।