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गदीर केवल इतिहास नहीं : गदीर-ए-खुम की घटना ने तय की इस्लामी नेतृत्व की दिशा

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Fri, Jun 5, 2026
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मौलाना आबिद अब्बास नकवी ने गदीर को बताया नेतृत्व और मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण अध्याय

उन्नाव। गदीर-ए-खुम की ऐतिहासिक घटना को केवल एक धार्मिक स्मृति तक सीमित न मानते हुए वक्ताओं ने इसे समाज को सही नेतृत्व, न्याय और इंसानियत का रास्ता दिखाने वाला महत्वपूर्ण संदेश बताया। इस विषय पर आयोजित एक विचार गोष्ठी में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया, जहां गदीर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके संदेश और वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता मौलाना आबिद अब्बास नकवी ने कहा कि इतिहास की कुछ घटनाएं समय के साथ पुरानी नहीं होतीं, बल्कि हर दौर में लोगों को नई दिशा देने का काम करती हैं। गदीर-ए-खुम भी ऐसी ही एक घटना है, जिसका संदेश आज के समय में पहले से अधिक महत्वपूर्ण दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि "गदीर" अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ पानी का तालाब या जलाशय होता है। हज की अदायगी के बाद जब पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.) मक्का से मदीना लौट रहे थे, तब मक्का और मदीना के बीच स्थित गदीर-ए-खुम नामक स्थान पर उन्होंने अपने विशाल काफिले को रुकने का निर्देश दिया। उस समय वहां लगभग सवा लाख हाजी मौजूद थे। मौलाना ने कहा कि अल्लाह के आदेश के बाद रसूल अल्लाह (स.अ.व.) ने लोगों को एकत्रित कर महत्वपूर्ण संबोधन दिया और हज़रत अली (अ.) का हाथ उठाकर ऐलान किया, "जिस-जिस का मैं मौला हूं, उस-उस के अली मौला हैं।"
मौलाना ने कहा कि यही वह ऐतिहासिक घोषणा है, जिसने गदीर-ए-खुम को इस्लामी इतिहास में एक विशेष स्थान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि इस घटना का मूल संदेश केवल किसी व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को यह समझाता है कि नेतृत्व का आधार न्याय, ईमानदारी, जिम्मेदारी और लोगों की भलाई होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की सफलता केवल आर्थिक विकास से नहीं मापी जा सकती, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करती है कि वहां न्याय कितना मजबूत है, नेतृत्व कितना जवाबदेह है और आम लोगों के अधिकारों का कितना सम्मान किया जाता है। गदीर का संदेश इन्हीं मूल सिद्धांतों को सामने रखता है। गोष्ठी में मौजूद अन्य वक्ताओं ने कहा कि आज दुनिया सामाजिक और नैतिक चुनौतियों के कठिन दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में गदीर-ए-खुम की शिक्षाएं समाज को एकजुटता, पारदर्शिता और जिम्मेदार नेतृत्व की ओर प्रेरित करती हैं। वक्ताओं का कहना था कि जब समाज में न्याय और नैतिकता कमजोर होती है, तब असमानता और अविश्वास बढ़ने लगता है। गदीर का संदेश इन समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है।कार्यक्रम में आधुनिक इस्लामी चिंतन और सामाजिक व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि इमाम खुमैनी ने गदीर की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर सामाजिक न्याय, आत्मनिर्भरता और जनसरोकारों को केंद्र में रखने की बात कही थी। इसी तरह आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई ने भी नैतिक मूल्यों, जनभागीदारी और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया है। वक्ताओं ने कहा कि गदीर का संदेश केवल मुस्लिम समाज के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। यह लोगों को सच्चाई, ईमानदारी, भाईचारे और मानव सेवा के रास्ते पर चलने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि यदि समाज के लोग अपने अधिकारों के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझें और न्यायपूर्ण व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दें, तो एक बेहतर और संतुलित समाज का निर्माण किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने लोगों से अपील की कि वे गदीर-ए-खुम को केवल इतिहास की एक घटना के रूप में न देखें, बल्कि उसके मूल संदेश को अपने दैनिक जीवन में उतारने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि न्याय, सद्भाव, नैतिकता और इंसानियत के मूल्यों को अपनाकर ही समाज को अधिक मजबूत, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील बनाया जा सकता है।

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Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

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