गौशाला में बदहाल इंतजाम : कई गौवंशों के शव मिलने से मचा हड़कंप
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Wed, Jul 29, 2026
सीवीओ के निरीक्षण में खुली व्यवस्थाओं की पोल, खाली मिलीं नांदें, चारा-पानी की व्यवस्था पर उठे सवाल, शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट
उन्नाव। जिले की एक गौशाला में गौवंशों की देखभाल को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। गौवंशों की लगातार मौत और परिसर में कई शव पड़े होने की सूचना पर पशुपालन विभाग हरकत में आया। बुधवार सुबह मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) डॉ. विनोद कुमार ने रऊ थाना गांव की गौशाला का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान उन्हें चारा, पानी और पशुओं की देखभाल से जुड़ी कई बड़ी खामियां मिलीं, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कही।गौशाला पहुंचे अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि परिसर में पिछले कई दिनों से 10 से 15 गौवंशों के शव पड़े हैं। समय पर उनका निस्तारण न होने से आसपास के इलाके में तेज दुर्गंध फैल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शव खुले में पड़े होने के कारण कुत्ते उन्हें नोच रहे हैं, जिससे संक्रमण फैलने का भी खतरा बना हुआ है। लोगों ने बताया कि कुछ शव तीन से चार दिन पुराने हैं, जबकि कुछ को एक सप्ताह से भी अधिक समय हो चुका है। निरीक्षण के दौरान सीवीओ डॉ. विनोद कुमार ने मौके पर तीन से चार मृत गौवंश मिलने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि गौशाला संचालकों को पहले भी स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि बीमार पशु का तत्काल इलाज कराया जाए और प्राकृतिक मृत्यु होने पर शवों का सम्मानपूर्वक और समय पर निस्तारण किया जाए, लेकिन निरीक्षण में इन निर्देशों का पालन नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि गौवंशों को निर्धारित मात्रा में चारा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। विभागीय मानकों के अनुसार प्रत्येक गौवंश को प्रतिदिन चार से पांच किलोग्राम भूसा, चार से पांच किलोग्राम हरा चारा और लगभग आधा किलोग्राम पशु आहार दिया जाना चाहिए। लेकिन निरीक्षण के समय नांदें खाली मिलीं। भूसे के स्थान पर मक्के के बड़े-बड़े टुकड़े डाले गए थे, जिन्हें पशु आसानी से खा भी नहीं पा रहे थे। इस पर सीवीओ ने तत्काल उन्हें हटाने और उचित चारे की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। सीवीओ ने बताया कि गौशाला में भूसे की आपूर्ति के जो दावे किए जा रहे हैं, उनकी भी अलग से जांच कराई जाएगी। यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर पाया गया तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि इस समय गौशाला का संचालन एक बाहरी एनजीओ के माध्यम से किया जा रहा है। उनका आरोप है कि निगरानी और व्यवस्थाओं की कमी के कारण गौवंशों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। वहीं पशुपालन विभाग ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए निरीक्षण रिपोर्ट शासन को भेजने और आगे की कार्रवाई कराने की बात कही है।
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