कार्रवाई की मांग : ईसाई समाज के कथित उत्पीड़न के खिलाफ भीम आर्मी का बड़ा प्रदर्शन
Wed, Jan 28, 2026
भीम आर्मी नेताओं ने कहा, संविधान के खिलाफ किसी भी अन्याय को नहीं करेंगे बर्दाश्त
उन्नाव। ईसाई समाज के लोगों पर हो रहे कथित अत्याचारों के विरोध में बुधवार को भीम आर्मी ने जोरदार प्रदर्शन किया। शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए निकले इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। प्रदर्शन का नेतृत्व भीम आर्मी लखनऊ मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल गौतम और जिला अध्यक्ष रवि बौद्ध ने किया। नेताओं का कहना था कि हाल के दिनों में ईसाई समुदाय को लगातार निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आ रही हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। उनका आरोप है कि कुछ जगहों पर धर्म के नाम पर डर और दबाव का माहौल बनाया जा रहा है, जिससे लोगों के मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए विशाल गौतम ने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की आजादी देता है। अगर किसी भी समुदाय के लोगों को उनके धर्म के कारण परेशान किया जाता है, तो यह सीधे तौर पर संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसी घटनाओं पर जल्द रोक नहीं लगी, तो भीम आर्मी इसे लेकर प्रदेश स्तर पर आंदोलन करेगी। वहीं जिला अध्यक्ष रवि बौद्ध ने कहा कि भीम आर्मी बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों पर चलने वाला संगठन है, जो बराबरी और इंसाफ की बात करता है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी धर्म या समुदाय के साथ अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन हर उस आवाज के साथ खड़ा है, जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शन के बाद भीम आर्मी के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि जिन मामलों में ईसाई समाज के लोगों के साथ अत्याचार हुए हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही ईसाई समुदाय को पर्याप्त सुरक्षा देने की भी मांग रखी गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। मौके पर पुलिस बल तैनात रहा और प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि ज्ञापन को उच्च स्तर तक भेजा जाएगा और मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ऑपरेशन मुस्कान : 101 गुमशुदा मोबाइल लौटे, चेहरे पर लौटी मुस्कान
Wed, Jan 28, 2026
सीईआईआर पोर्टल की मदद से बरामद हुए 21 लाख के मोबाइल, अब तक 1400 से ज्यादा की रिकवरी
उन्नाव। मोबाइल फोन गुम होने के बाद मायूसी झेल रहे लोगों के लिए पुलिस की पहल राहत लेकर आई है। दूरसंचार विभाग, संचार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विकसित सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से उन्नाव पुलिस ने 101 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को सौंप दिए। बरामद किए गए मोबाइलों की अनुमानित कीमत करीब 21 लाख रुपये बताई जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह के निर्देश पर जिले के सभी थानों में विशेष टीमें गठित की गई थीं। थानों पर प्राप्त होने वाली हर मोबाइल गुमशुदगी की शिकायत को प्राथमिकता के आधार पर सीईआईआर पोर्टल पर दर्ज कराया गया और तकनीकी निगरानी के जरिए उनकी तलाश शुरू की गई। एसएसपी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि गुमशुदा मोबाइल की बरामदगी में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी अखिलेश सिंह और अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी प्रेमचंद के पर्यवेक्षण में सर्विलांस सेल और जिले के सभी थानों की संयुक्त टीम ने इस अभियान को अंजाम दिया। सीईआईआर पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर अलग-अलग स्थानों से विभिन्न कंपनियों के एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई ऑपरेशन मुस्कान के तहत की जा रही है। मोबाइल गुमशुदगी की शिकायत मिलते ही संबंधित मोबाइल के आईएमईआई नंबर के आधार पर उसकी तकनीकी निगरानी शुरू कर दी जाती है। जैसे ही मोबाइल नेटवर्क पर सक्रिय होता है, उसकी लोकेशन ट्रेस कर टीम मौके पर पहुंचती है। इसी प्रक्रिया के चलते लगातार सफलता मिल रही है।
आंकड़े इस अभियान की मजबूती खुद बयां करते हैं। सितंबर 2024 से अब तक उन्नाव पुलिस की सर्विलांस टीम 707 से अधिक मोबाइल फोन बरामद कर चुकी है, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये है। वहीं वर्ष 2025 में अब तक 700 से ज्यादा मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत 4 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इस प्रकार अब तक कुल 1400 से अधिक गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं।
बुधवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान बरामद 101 मोबाइल फोन उनके वास्तविक स्वामियों को सौंपे गए। अपने मोबाइल वापस पाकर लोगों के चेहरों पर राहत और खुशी साफ नजर आई। कई लोगों ने कहा कि मोबाइल गुम होने के बाद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह दोबारा मिल पाएगा और इसके लिए उन्होंने उन्नाव पुलिस का आभार जताया।
इस सफल बरामदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सर्विलांस टीम के कांस्टेबल शुभम तोमर, प्रशांत बालियान, अरुण यादव, सुदीप कटियार, आकाश चौधरी और विवेक को उनकी सराहनीय कार्यशैली और तकनीकी दक्षता के लिए प्रशंसा पत्र देने की घोषणा की गई है।
इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि गुमशुदा मोबाइल की बरामदगी से न केवल लोगों की व्यक्तिगत संपत्ति वापस मिलती है, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल आज हर व्यक्ति की अहम जरूरत बन चुका है और ऐसे में उसे वापस दिलाना पुलिस की जिम्मेदारी है। एसएसपी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन मुस्कान के तहत गुमशुदा संपत्ति की बरामदगी और लापता लोगों की तलाश आगे भी इसी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ जारी रहेगी। साथ ही उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि मोबाइल फोन गुम या चोरी होने की स्थिति में तुरंत संबंधित थाने में सूचना दें और सीईआईआर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर मोबाइल की बरामदगी सुनिश्चित की जा सके।
भरोसे का सौदा : नौकरी दिलाने के नाम पर 35 लाख की ठगी करने वाला गिरफ्तार
Wed, Jan 28, 2026
फर्जी दस्तावेज और झूठी पहचान के सहारे चलता रहा ठगी का खेल, कई पीड़ित आए सामने
उन्नाव। नौकरी दिलाने के नाम पर लाखो की ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को आसीवन थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को बड़े मेडिकल संस्थानों से जुड़ा बताकर बेरोजगारों को झांसे में लेता था और फर्जी नियुक्ति पत्र थमा देता था। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने अलग-अलग लोगों से कुल 35 लाख 20 हजार रुपये की ठगी की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उन्नाव के निर्देश पर चलाए जा रहे अपराध विरोधी अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने लंबी जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दबोच लिया।
खुद को पीजीआई से जुड़ा बताया, लाखों ऐंठे
पुलिस के अनुसार, आसीवन क्षेत्र के गांव जारुल्लानगर निवासी मनोज कुमार पुत्र छेदीलाल ने 3 सितंबर 2024 को थाने में शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया कि लखनऊ निवासी मनोज कुमार नाम के व्यक्ति ने खुद को पीजीआई लखनऊ में असिस्टेंट डायरेक्टर के प्रशासनिक विभाग से जुड़ा बताया। उसने यह भी दावा किया कि उसकी पहुंच ऊंचे अधिकारियों तक है और वह आसानी से नौकरी लगवा सकता है। इसी भरोसे पर मनोज कुमार से 6 लाख रुपये लिए गए। बाद में आरोपी ने फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया। जब नौकरी ज्वाइन कराने की बात आई तो टालमटोल शुरू हो गई। जांच में सामने आया कि आरोपी ने सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई लोगों को इसी तरह ठगा।
कई पीड़ित, अलग-अलग रकम
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने रुपनारायण से 13 लाख रुपये, करुणा शंकर से 4.50 लाख रुपये, सुनील कुमार से 4 लाख रुपये, दिलीप वर्मा से 4 लाख रुपये और कमलेश से 3.70 लाख रुपये इस तरह कुल 35.20 लाख रुपये नौकरी लगवाने के नाम पर वसूले। सभी को पीजीआई लखनऊ से जुड़ा बताकर कूटरचित नियुक्ति पत्र दिए गए।
फर्जी दस्तावेज, असली ठगी
जांच में यह भी पता चला कि आरोपी शिक्षण संस्थानों से जुड़ा रहा है और इसी पहचान का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतता था। वह खुद को माइक्रोबायोलॉजी का प्रोफेसर और टीएस मिश्रा यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बताता था। इसी प्रोफाइल के दम पर वह बेरोजगारों को अपने जाल में फंसाता था।
मेडिकल कॉलेज से गिरफ्तारी
थाना आसीवन थाना प्रभारी प्रदीप सिंह ने बताया कि आरोपी मनोज कुमार को सोहरामऊ थाना क्षेत्र स्थित प्रसाद मेडिकल कॉलेज से गिरफ्तार किया। इसके बाद उसे न्यायालय में पेश करके जेल भेज दिया। आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी या बड़े संस्थान में नौकरी के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें। किसी भी नियुक्ति पत्र या नौकरी के दावे की पहले संबंधित विभाग से पुष्टि जरूर करें, ताकि ऐसे ठगों के जाल में न फंसा जा सके।