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: भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोपी दरोगा की बर्खास्तगी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की रद्द, सुनवाई में कहा- याचिकाकर्ता को बहाल किया जाए!

THE LUCKNOW TIMES

Sat, May 24, 2025
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भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोपी दरोगा की बर्खास्तगी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की रद्द, सुनवाई में कहा- याचिकाकर्ता को बहाल किया जाए!

    उत्तर प्रदेश प्रयागराज : दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को अपने एक आदेश में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोपी दरोगा की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया, कोर्ट ने कहा है कि पुलिस अधिकारियों की (दंड एवं अपील) नियमावली 1991 के नियम 8 (2) (B) के प्रावधानों के तहत पर्याप्त साक्ष्य होने पर भी बगैर विभागीय कार्यवाही के बर्खास्तगी करना अवैध है, कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना नियम व कानून के विरुद्ध है, ये आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने दिया है, याचिकाकर्ता के वकील के मुताबिक गौतमबुद्धनगर के फेस-1 थाने में चौकी इंचार्ज गोलचक्कर प्रदीप कुमार गौतम पर ये आरोप है कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसकी जांच में पाया गया कि वायरल वीडियों में एक व्यक्ति अपनी जेब में हाथ डालता है और पास खड़े उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार गौतम को कुछ रुपये पकड़ाता है आरोप लगाया गया कि उस शख्स की ओर से चौकी प्रभारी को रिश्वत दी जा रही थी. कहा गया कि दरोगा का ये कृत्य यूपी सरकारी सेवक आचरण नियमावली के खिलाफ है, जिससे पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई है. वीडियो के अवलोकन से प्रथमदृष्टया अपराध होना पाए जाने के बाद उस मामले में दिनांक पांच अप्रैल 2025 को दरोगा के खिलाफ थाना फेस-1, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7/13 के तहत अभियोग पंजीकृत कराया गया हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि पुलिसकर्मी की बर्खास्तगी बगैर विभागीय कार्यवाही के अवैध है. उप्र अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की (दंड एवं अपील) नियमावली 1991 के नियम 8 (2) (बी) के प्रावधानों के तहत पर्याप्त साक्ष्य के आधार होने पर भी बगैर स्पष्ट कारण बताए कि क्यों विभागीय कार्यवाही नहीं की जा सकती, बर्खास्त करना नियम एवं कानून के विरुद्ध है याचिका में कहा गया कि याची पर बर्खास्तगी आदेश में जो आरोप लगाए गए हैं, वे बिल्कुल असत्य और निराधार है, याची को साजिशन अभियुक्त द्वारा षडयंत्र करके झूठा फंसाया गया है जबकि याची ने रिश्वत के एवज में कोई भी पैसा नहीं लिया और न ही याची के पास से कोई रिकवरी हुई है, याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि उक्त प्रकरण में बगैर विभागीय कार्यवाही किए ओर बगैर नोटिस, सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए याची को सेवा से पदच्युत किया गया है जो सर्वोच्च न्यायालय एवं इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा प्रतिपादित विधि व्यवस्था के विरुद्ध है, हाईकोर्ट ने अपर पुलिस आयुक्त मुख्यालय गौतमबुद्धनगर द्वारा दरोगा की बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया और याची को बहाल करने का आदेश दिया है!

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