Fri 19 Jun 2026

ब्रेकिंग

मेयर विनोद अग्रवाल रहे विशिष्ट अतिथि PM मोदी का मिला वर्चुअल मार्गदर्शन, युवाओं से कौशल और परिश्रम से राष्ट्र निर्माण

ससुराल जाते समय हादसे का शिकार हुआ अधेड़

एंटी करप्शन टीम द्वारा कैंटीन में जाल बिछाकर गिरफ्तार करने से क्षेत्र में फैली सनसनी

साधु हत्याकांड के आरोपी के एनकाउंटर की होगी पड़ताल

570 करोड़ की 101 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास

सूचना

BREAKING NEWS

CRIME BREAKING

पांच सौ साल पुराना तकिया मेला : रामायण से लेकर अवध दरबार तक, पाटन की धरती कई ऐतिहासिक कड़ियों की गवाह

सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान

Tue, Dec 9, 2025
Post views : 589

सहस्त्रलिंगेश्वर मंदिर और सूफी संत मोहब्बतशाह बाबा की मजार लोगों को जोड़ती है

उन्नाव। बीघापुर तहसील के पाटन कस्बे में पौष माह के पहले गुरुवार से शुरू होने वाला तकिया मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है। यह उस साझी तहजीब की मिसाल है, जिसने सदियों तक लोगों को एक-दूसरे से जोड़े रखा है। करीब पांच शताब्दी पुराने इस मेले में हिंदू और मुस्लिम समुदाय एक ही परिसर में आस्था जताते हैं। मेला स्थल की खास पहचान यह है कि यहां बाबा सहस्त्रलिंगेश्वर महादेव का मंदिर, सूफी संत मोहब्बतशाह बाबा की मजार, और उनके शिष्य न्यामत शाह की मजार साथ स्थित हैं। लोग मानते हैं कि यह संगम पाटन की मिट्टी में रची-बसी सद्भाव की पुरानी परंपरा का प्रतीक है।

मोहब्बतशाह बाबा: जो मंदिर में पूजा करते थे, मस्जिद में नमाज भी पढ़ते थे

गद्दीधरों का कहना है कि मोहब्बतशाह बाबा उदार और सभी को साथ लेकर चलने वाले संत थे। वे सहस्त्रलिंगेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे और मस्जिद में नमाज भी पढ़ते थे। उनके जीवन का लिखित इतिहास भले ज्यादा उपलब्ध नहीं है, लेकिन पाटन तकिया के काजी मोहम्मद इलियास बताते हैं कि उनका जन्म इराक के हेरात में हुआ था और अंतिम समय बीघापुर के इसी तकिया में बिताया। वर्तमान गद्दीधर अली हुसैनशाह खुद को उनकी 18वीं पीढ़ी बताते हैं। परंपरा के मुताबिक, आज भी गद्दीधर बाबा सहस्त्रलिंगेश्वर की आराधना करते हैं, जिससे उस साझा संस्कृति की डोर कायम है, जिसने इस मेले को इतना खास बनाया।

कई जगहों पर दिए उपदेश, पाटन में बनाई कुटिया

कथाओं के अनुसार, मोहब्बतशाह बाबा सरगुजा, बंजरिया (बहराइच), कटरा चरखारी, जिंगनी और महुआहार जैसे कई स्थानों पर रुके और लोगों को उपदेश दिए। बाद में वे सहस्त्रलिंगेश्वर मंदिर के सामने बने एक शांत स्थान पर रहने लगे। वहीं उनकी कुटिया थी और यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। अवध गजेटियर में नवाब आसफ-उद-दौला द्वारा बाबा से हुई मुलाकात का भी जिक्र मिलता है, जो इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ाता है।

रामायण से जुड़ी मान्यता भी देती है पाटन को अलग पहचान

गड़रियाखेड़ा के शिक्षक दिलीप सिंह ने बताया कि लोकमान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान राम इसी मार्ग से श्रंगबेरपुर की ओर गए थे। मंदिर के पुजारी राजकिशोर कहते हैं कि पाटन में रात्रि प्रवास के समय भगवान राम को स्वप्न में शिवलिंग के दर्शन हुए थे। यह मान्यता स्थानीय लोगों की आस्था को और गहरी बनाती है।

मेले में उमड़ती है आस्था और अपनत्व की भीड़

पौष के पहले गुरुवार से लगने वाला यह मेला हर साल हजारों लोगों को जोड़ता है। किसी के लिए यह धार्मिक अनुष्ठान का मौका है, तो किसी के लिए सद्भाव का अनुभव करने का। मंदिर में दर्शन और मजार पर चादरपोशी दोनों ही एक साथ होते हैं। इसी सांझेपन ने तकिया मेले को बीघापुर ही नहीं, पूरे क्षेत्र में एक अनोखी पहचान दी है।

Tags :

Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन