मातमी जुलूस : 8वीं मोहर्रम की रात निकला हज़रत अब्बास (अ.स.) की याद में गूंजती रहीं “या अब्बास” की सदाएं
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Thu, Jun 25, 2026
ज़ेर खिड़की से चौधराना तक निकले जुलूस में बड़ी संख्या में शामिल हुए मातमदार, सुरक्षा में पुलिस रही तैनात
उन्नाव। मोहर्रम की 8वीं रात शहर का माहौल गम और अकीदत में डूबा नजर आया। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के वफादार भाई हज़रत अब्बास (अ.स.) की शहादत की याद में देर रात उन्नाव शहर में मातमी जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी तादाद में अकीदतमंद शामिल हुए। जुलूस में शामिल लोगों ने नौहाख्वानी और मातम के जरिए कर्बला के उस दर्दनाक मंजर को याद किया, जब हज़रत अब्बास (अ.स.) ने प्यासे बच्चों के लिए फरात से पानी लाने की कोशिश में अपनी जान कुर्बान कर दी थी। मातमी जुलूस शहर के ज़ेर खिड़की मोहल्ले से शुरू हुआ। यहां से जुलूस अपने तय रास्तों से गुजरते हुए चौधराना पहुंचा और फिर वापस अपने शुरुआती स्थान पर आकर खत्म हुआ। पूरे रास्ते माहौल गमगीन रहा और “या अब्बास” व “या हुसैन” की सदाओं से फिजा गूंजती रही। जुलूस में अंजुमन हुसैनिया और अंजुमन अज़ा-ए-हुसैन के मातमदारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मातमदारों ने सीना-ज़नी कर हज़रत अब्बास (अ.स.) की शहादत को याद किया। नौहाख्वानों ने अपने कलाम के जरिए कर्बला की कुर्बानियों को बयान किया, जिसे सुनकर कई अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। जुलूस में शामिल ज़ुल्जना, अलम और ताबूत लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। रास्ते भर लोग अपने घरों और गलियों से निकलकर जुलूस में शामिल हुए और अदब के साथ सलाम पेश किया। कई जगहों पर लोगों ने मातमदारों के लिए पानी और शरबत का भी इंतजाम किया। मोहर्रम के इन दिनों में निकलने वाले ऐसे जुलूस सिर्फ गम का इज़हार नहीं होते, बल्कि कर्बला के पैगाम, सब्र, कुर्बानी और इंसाफ की याद भी दिलाते हैं। हज़रत अब्बास (अ.स.) की शहादत को वफादारी और बहादुरी की सबसे बड़ी मिसाल माना जाता है। जुलूस को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया। पूरे रूट पर पुलिस बल तैनात रहा और अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी की। प्रशासन की मौजूदगी में जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
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Unnao, THE LUCKNOW TIMES, uttar Pradesh news
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