समस्या : बिजली कटौती को लेकर सपा नेताओं ने एसडीओ से की शिकायत
Fri, Jun 5, 2026
मामूली खराबी पर लंबे शटडाउन से व्यापारियों और घरेलू उपभोक्ताओं को दिक्कत
रात चार बजे तक गुल रही बिजली, दिनभर फाल्ट से जूझते रहे उपभोक्ता
उन्नाव। भीषण गर्मी के बीच शहर के कई इलाकों में लगातार हो रही बिजली कटौती और बार-बार के शटडाउन से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को समाजवादी पार्टी अल्पसंख्यक सभा के जिलाध्यक्ष नियाज खान और नगर पालिका सभासद मेराज खान ने बिजली विभाग के एसडीओ से मुलाकात कर कसाई चौराहा फीडर से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और जल्द समाधान की मांग की।प्रतिनिधिमंडल ने एसडीओ को बताया कि छोटे चौराहे फीडर से जुड़े अब्बास बाग, सुंदर टॉकीज के पीछे का इलाका, गंदा नाला क्षेत्र और जामा मस्जिद ट्रांसफार्मर का लोड कसाई चौराहा फीडर पर स्थानांतरित किए जाने के बाद फीडर पर क्षमता से अधिक भार पड़ रहा है। इसके चलते आए दिन तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं और किसी भी क्षेत्र में फाल्ट आने पर पूरे फीडर की बिजली आपूर्ति बाधित करनी पड़ती है। सभासद मेराज खान ने कहा कि छोटे चौराहे और कसाई चौराहा फीडर का लोड एक साथ जोड़ने के बाद से समस्या लगातार बढ़ी है। उन्होंने बताया कि गुरुवार रात से शुक्रवार सुबह तक बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमराई रही। रात में करीब चार बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रही। इसके बाद सुबह छह बजे बिजली आई, लेकिन साढ़े नौ बजे तक ही आपूर्ति सुचारु रह सकी। इसके बाद दिनभर फाल्ट और तकनीकी खराबियों के कारण लोगों को बिजली संकट का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि मामूली फाल्ट होने पर भी लंबे समय तक शटडाउन लिया जाता है, जिससे हजारों उपभोक्ता प्रभावित होते हैं। गर्मी के इस मौसम में लोगों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। घरों में पानी की समस्या से लेकर बच्चों की पढ़ाई और व्यापारिक गतिविधियों तक पर असर पड़ रहा है। सपा अल्पसंख्यक सभा के जिलाध्यक्ष नियाज खान ने कहा कि बढ़े हुए लोड के कारण एक फेज की समस्या भी लगातार सामने आ रही है। रात के समय घंटों बिजली बाधित रहने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि कई मोहल्लों में लोगों की नींद तक पूरी नहीं हो पा रही है और भीषण गर्मी के कारण हालात और कठिन हो गए हैं। उन्होंने मांग की कि कसाई चौराहा फीडर पर बढ़े अतिरिक्त लोड को कम करने के लिए प्रभावी तकनीकी व्यवस्था की जाए। साथ ही ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए कि किसी एक स्थान पर फाल्ट होने की स्थिति में पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बाधित न हो। उपभोक्ताओं को नियमित और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। प्रतिनिधिमंडल ने एसडीओ से जल्द आवश्यक तकनीकी सुधार कर समस्या के स्थायी समाधान की मांग की। इस पर एसडीओ ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया।
गदीर केवल इतिहास नहीं : गदीर-ए-खुम की घटना ने तय की इस्लामी नेतृत्व की दिशा
Fri, Jun 5, 2026
मौलाना आबिद अब्बास नकवी ने गदीर को बताया नेतृत्व और मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण अध्याय
उन्नाव। गदीर-ए-खुम की ऐतिहासिक घटना को केवल एक धार्मिक स्मृति तक सीमित न मानते हुए वक्ताओं ने इसे समाज को सही नेतृत्व, न्याय और इंसानियत का रास्ता दिखाने वाला महत्वपूर्ण संदेश बताया। इस विषय पर आयोजित एक विचार गोष्ठी में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया, जहां गदीर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके संदेश और वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता मौलाना आबिद अब्बास नकवी ने कहा कि इतिहास की कुछ घटनाएं समय के साथ पुरानी नहीं होतीं, बल्कि हर दौर में लोगों को नई दिशा देने का काम करती हैं। गदीर-ए-खुम भी ऐसी ही एक घटना है, जिसका संदेश आज के समय में पहले से अधिक महत्वपूर्ण दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि "गदीर" अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ पानी का तालाब या जलाशय होता है। हज की अदायगी के बाद जब पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.) मक्का से मदीना लौट रहे थे, तब मक्का और मदीना के बीच स्थित गदीर-ए-खुम नामक स्थान पर उन्होंने अपने विशाल काफिले को रुकने का निर्देश दिया। उस समय वहां लगभग सवा लाख हाजी मौजूद थे। मौलाना ने कहा कि अल्लाह के आदेश के बाद रसूल अल्लाह (स.अ.व.) ने लोगों को एकत्रित कर महत्वपूर्ण संबोधन दिया और हज़रत अली (अ.) का हाथ उठाकर ऐलान किया, "जिस-जिस का मैं मौला हूं, उस-उस के अली मौला हैं।"
मौलाना ने कहा कि यही वह ऐतिहासिक घोषणा है, जिसने गदीर-ए-खुम को इस्लामी इतिहास में एक विशेष स्थान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि इस घटना का मूल संदेश केवल किसी व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को यह समझाता है कि नेतृत्व का आधार न्याय, ईमानदारी, जिम्मेदारी और लोगों की भलाई होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की सफलता केवल आर्थिक विकास से नहीं मापी जा सकती, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करती है कि वहां न्याय कितना मजबूत है, नेतृत्व कितना जवाबदेह है और आम लोगों के अधिकारों का कितना सम्मान किया जाता है। गदीर का संदेश इन्हीं मूल सिद्धांतों को सामने रखता है। गोष्ठी में मौजूद अन्य वक्ताओं ने कहा कि आज दुनिया सामाजिक और नैतिक चुनौतियों के कठिन दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में गदीर-ए-खुम की शिक्षाएं समाज को एकजुटता, पारदर्शिता और जिम्मेदार नेतृत्व की ओर प्रेरित करती हैं। वक्ताओं का कहना था कि जब समाज में न्याय और नैतिकता कमजोर होती है, तब असमानता और अविश्वास बढ़ने लगता है। गदीर का संदेश इन समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है।कार्यक्रम में आधुनिक इस्लामी चिंतन और सामाजिक व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि इमाम खुमैनी ने गदीर की शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर सामाजिक न्याय, आत्मनिर्भरता और जनसरोकारों को केंद्र में रखने की बात कही थी। इसी तरह आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई ने भी नैतिक मूल्यों, जनभागीदारी और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया है। वक्ताओं ने कहा कि गदीर का संदेश केवल मुस्लिम समाज के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। यह लोगों को सच्चाई, ईमानदारी, भाईचारे और मानव सेवा के रास्ते पर चलने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि यदि समाज के लोग अपने अधिकारों के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझें और न्यायपूर्ण व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दें, तो एक बेहतर और संतुलित समाज का निर्माण किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने लोगों से अपील की कि वे गदीर-ए-खुम को केवल इतिहास की एक घटना के रूप में न देखें, बल्कि उसके मूल संदेश को अपने दैनिक जीवन में उतारने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि न्याय, सद्भाव, नैतिकता और इंसानियत के मूल्यों को अपनाकर ही समाज को अधिक मजबूत, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील बनाया जा सकता है।
अंकित सिंह परिहार ने थामा छात्र का हाथ : छात्र की बीटेक फीस भरकर बढ़ाया हौसला
Fri, Jun 5, 2026
करीब एक लाख रुपये की फीस जमा कराकर जरूरतमंद मेधावी छात्र को दिया सहारा
उन्नाव। राजनीति में अक्सर नेताओं के काम चुनावी वादों और घोषणाओं तक सीमित दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जनसेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बना लेते हैं। भगवंतनगर क्षेत्र में अंकित सिंह परिहार का नाम ऐसे ही लोगों में लिया जाता है, जो पिछले करीब दो दशकों से क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनकर लगातार सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं। क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उनके प्रयासों की विशेष चर्चा होती रही है। आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए वे लगातार सहायता प्रदान करते रहे हैं। बताया जाता है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में जरूरतमंद छात्र-छात्राओं की फीस, पुस्तकों और अन्य शैक्षिक जरूरतों में सहयोग किया जाता है, जिससे कई युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिला है। इसी क्रम में भगवंतनगर क्षेत्र के रामपुर खरही निवासी अंकित शुक्ला की बीटेक की पढ़ाई के लिए लगभग एक लाख रुपये की फीस जमा कराई गई है। आर्थिक कठिनाइयों के कारण उच्च शिक्षा का सपना अधूरा पड़ने की स्थिति में पहुंच चुके छात्र को इस सहयोग से बड़ी राहत मिली है। परिवार के लोगों ने भी इस मदद को छात्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए आभार व्यक्त किया है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अंकित सिंह परिहार ने वर्षों से सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरतमंद परिवारों की सहायता को प्राथमिकता दी है। यही कारण है कि क्षेत्र में उन्हें केवल एक राजनीतिक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के साथ खड़े रहने वाले जनसेवक के रूप में देखा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, किसी भी क्षेत्र में जनविश्वास एक दिन में नहीं बनता। इसके पीछे वर्षों का निरंतर संपर्क, लोगों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता और सेवा का भाव होता है। भगवंतनगर क्षेत्र में अंकित सिंह परिहार की पहचान भी इसी लंबे सामाजिक जुड़ाव और जनसेवा की परंपरा से बनी है।