प्लॉट के सौदे में 5.50 लाख फंसे : पिता-पुत्र पर केस; रुपये मांगने पर धमकी का आरोप
Sun, Sep 6, 2026
10 लाख में तय हुई थी जमीन, 5.90 लाख देने के बाद भी नहीं कराया बैनामा
उन्नाव। शहर में प्लॉट खरीदने का सपना लेकर एक युवक ने कई महीनों में 5.90 लाख रुपये जुटाकर दे दिए, लेकिन जमीन उसके नाम नहीं हुई। बैनामे की बात आई तो मामला टलता गया और आखिरकार प्लॉट देने से इनकार कर दिया गया। रुपये वापस मांगने पर भी पूरी रकम नहीं मिली। अब इस मामले में दही पुलिस ने एबी नगर निवासी पिता-पुत्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। दही थाना क्षेत्र के बस्ती खेड़ा, मजरा ओरहर निवासी राघवेंद्र सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि अगस्त 2025 में उसकी मुलाकात ब्रजेश कुमार शुक्ला से हुई थी। बातचीत के दौरान उसने शहर में प्लॉट लेने की इच्छा जताई। आरोप है कि ब्रजेश ने बताया कि उसके पिता शुभकरन लाल शुक्ला के नाम कई प्लॉट हैं और उनमें से पसंद आने वाला प्लॉट खरीदा जा सकता है। इसके बाद उसे शिव नगर में एक प्लॉट दिखाया गया। पसंद आने पर दोनों पक्षों के बीच 10 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। आरोप है कि पांच लाख रुपये पहले देने और बाकी रकम बैनामा के समय देने की बात कही गई थी। ब्रजेश के पिता की सहमति के बाद राघवेंद्र ने रकम देना शुरू कर दिया।
अलग-अलग तारीखों में भेजे रुपये
राघवेंद्र के मुताबिक उसने बैंक खातों और ऑनलाइन भुगतान के जरिये कई किस्तों में रकम ट्रांसफर की। कुछ रकम ब्रजेश की फर्म माधुरी इंटरप्राइजेज के खाते में और बाकी सीधे ब्रजेश कुमार शुक्ला के खाते में भेजी गई। इस तरह कुल 5.90 लाख रुपये दिए गए। रकम देने के बाद राघवेंद्र बैनामा कराने के लिए कहता रहा, लेकिन आरोप है कि पिता-पुत्र लगातार तारीख टालते रहे। कुछ समय बाद उन्होंने प्लॉट बेचने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद युवक ने जमीन के बजाय अपनी रकम वापस मांगी।
40 हजार लौटाकर बाकी रकम पर विवाद
पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार रकम वापस मांगने के बाद ब्रजेश ने दो बार ऑनलाइन भुगतान किया। 6 फरवरी 2026 को 17 हजार और 27 फरवरी को 23 हजार रुपये वापस किए गए। कुल 40 हजार रुपये मिलने के बाद भी 5.50 लाख रुपये बकाया रह गए। आरोप है कि इसके बाद राघवेंद्र लगातार अपनी रकम मांगता रहा, लेकिन उसे भुगतान नहीं किया गया। 15 जुलाई को वह फिर रुपये मांगने ब्रजेश के घर पहुंचा। वहां विवाद बढ़ गया। राघवेंद्र का आरोप है कि ब्रजेश और उसके पिता ने गालीगलौज करते हुए रुपये लौटाने से इनकार कर दिया और जान से मारने की धमकी दी।
थाने से एसपी तक पहुंचा मामला
राघवेंद्र ने पहले दही थाने में शिकायत की थी। कार्रवाई नहीं होने पर उसने चार अगस्त को पुलिस अधीक्षक को रजिस्टर्ड डाक से प्रार्थनापत्र भेजा। इसके बाद दही पुलिस ने पिता-पुत्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस अब प्लॉट से संबंधित दस्तावेज, दोनों पक्षों के बीच हुए लेनदेन और ऑनलाइन भुगतान के रिकॉर्ड की जांच करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्लॉट के सौदे के समय दोनों पक्षों के बीच क्या सहमति बनी थी और रकम किस आधार पर ली गई थी।
रात में घर लौट रहे युवक को घेरा : सिर पर किया हमला; रिपोर्ट दर्ज
Sun, Sep 6, 2026
चार युवकों पर मारपीट का आरोप, मोबाइल तोड़ने और धमकी देने की भी शिकायत
उन्नाव। रात के वक्त घर लौट रहे एक युवक को रास्ते में रोककर मारपीट करने का मामला सदर कोतवाली में दर्ज हुआ है। युवक का आरोप है कि पहले से रास्ते में मौजूद चार लोगों ने उसे घेर लिया। गाली-गलौज के बाद विवाद बढ़ा तो लाठी-डंडों और लोहे के कड़े से हमला कर दिया। सिर में चोट लगने से वह लहूलुहान हो गया। आरोप है कि मारपीट के दौरान मोबाइल फोन भी तोड़ दिया गया। जाते-जाते आरोपियों ने जान से मारने की धमकी भी दी। तालिब सराय निवासी अंशू कश्यप के मुताबिक 28 अगस्त की रात करीब 11:40 बजे वह अपने घर जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में अथक यादव, शिवा धानुक, सचिन यादव और जातिन मिल गए। अंशू का आरोप है कि चारों ने उसे रोककर गाली-गलौज शुरू कर दी। उसने विरोध किया तो सभी ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी।
शोर सुनकर पहुंचे लोग, बचाई जान
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि हमले में लाठी-डंडों के अलावा लोहे के कड़े का भी इस्तेमाल किया गया। मारपीट में उसके सिर पर चोट लगी और शरीर के दूसरे हिस्सों में भी चोटें आईं। इसी दौरान उसका मोबाइल फोन भी तोड़ दिया गया। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों के बीच में आने के बाद किसी तरह मामला शांत हुआ और उसकी जान बच सकी।
हमले के बाद परिवार को सता रहा डर
अंशू ने पुलिस को दी तहरीर में कहा है कि घटना के बाद से वह और उसका परिवार डरा हुआ है। उसे आशंका है कि आरोपी दोबारा उसके साथ मारपीट कर सकते हैं। इसी को लेकर उसने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।
5 सितंबर को दी तहरीर, दर्ज हुई रिपोर्ट
घटना 28 अगस्त की बताई गई है, जबकि पीड़ित ने 5 सितंबर को सदर कोतवाली में तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर अथक यादव, शिवा धानुक, सचिन यादव और जातिन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। एफआईआर में चारों के वर्तमान पते ‘अज्ञात’ दर्ज हैं। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।
ठगों ने उड़ाए 1.01 लाख : साइबर टीम ने वापस कराए
Sun, Sep 6, 2026
साइबर टीम की तेजी से तीन दिन में पीड़ित को वापस मिली पूरी रकम
उन्नाव। क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर साइबर ठगों के जाल में फंसे शहर के एक व्यक्ति को पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बड़ी राहत मिली। खाते से निकाली गई 1,00,557 रुपये की पूरी रकम साइबर टीम ने वापस करा दी। रकम वापस मिलने के बाद पीड़ित ने पुलिस की कार्रवाई पर राहत जताई।मामला कोतवाली सदर क्षेत्र का है। पीड़ित संकल्प सिंह के पास क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के संबंध में संपर्क किया गया था। बातचीत के दौरान साइबर ठगों ने उसे अपने झांसे में ले लिया। इसके बाद तीन सितंबर को उसके खाते से 1,00,557 रुपये की रकम निकल गई। खाते से बड़ी रकम जाने की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की।
शिकायत मिलते ही शुरू हुई पड़ताल
मामले की सूचना मिलने पर कोतवाली सदर की साइबर टीम ने देर किए बिना लेनदेन से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू की। टीम ने संबंधित बैंकिंग ट्रांजेक्शन और रकम के मूवमेंट को ट्रेस करते हुए उसे रोकने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस की सक्रियता के चलते ठगी की रकम को वापस कराने का रास्ता साफ हुआ।साइबर टीम की लगातार कार्रवाई के बाद छह सितंबर को 1,00,557 रुपये की पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई। रकम वापस आने की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने पुलिस का आभार जताया।
साइबर ठगी में समय पर शिकायत सबसे जरूरी
सदर कोतवाली निरिक्षक चंद्रकांत मिश्र का कहना है कि साइबर ठगी का शिकार होने के बाद जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, रकम को रोकने और वापस कराने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। क्रेडिट कार्ड, बैंक खाते, ओटीपी, केवाईसी या किसी ऑनलाइन सुविधा के नाम पर अनजान व्यक्ति से जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। कार्रवाई करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक चन्द्रकान्त मिश्र समेत साइबर टीम के पुलिसकर्मी शामिल रहे। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन ठगी होने पर घबराने के बजाय तत्काल पुलिस को सूचना दें, ताकि रकम को समय रहते सुरक्षित कराने की कार्रवाई की जा सके।