डंपर से टकराने के बाद पीछे हटी रोडवेज बस : तीन लोगों की दर्दनाक मौत
Sat, Jul 11, 2026
नुकसान देखने के लिए बस से नीचे उतरे थे यात्री, परिचालक समेत चार लोग चपेट में आए
उन्नाव। कानपुर-लखनऊ हाईवे पर दही थाना क्षेत्र स्थित रोडवेज वर्कशॉप के पास शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में तीन लोगों की जान चली गई। डंपर से टकराने के बाद बस से नीचे उतरकर क्षतिग्रस्त हिस्से का जायजा ले रहे यात्रियों को यह अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही पल बाद वही बस उनकी मौत का कारण बन जाएगी। चालक ने बस को पीछे हटाना शुरू किया और पीछे खड़े लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बस का परिचालक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस के अनुसार रोडवेज बस हाईवे पर आगे चल रहे एक डंपर से टकरा गई थी। टक्कर के बाद बस रुक गई और कुछ यात्री व परिचालक नीचे उतरकर आगे हुए नुकसान को देखने लगे। इसी दौरान चालक ने बिना पीछे की स्थिति देखे बस पीछे कर दी, जिससे चार लोग उसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही दही थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घायलों को बाहर निकलवाया, लेकिन तीन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घायल परिचालक को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। हादसे के कारण कुछ देर तक हाईवे पर यातायात भी प्रभावित रहा, जिसे पुलिस ने बाद में सामान्य कराया। मृतकों की पहचान राजेंद्र (50) पुत्र स्वामी प्रसाद, निवासी मदनपुर, थाना कप्तानगंज, जिला बस्ती तथा रामनरेश (40) पुत्र रामदास, निवासी तुलसी तारा, थाना पूरा कलंदर, जनपद अयोध्या के रूप में हुई है। तीसरे मृतक की पहचान कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने बताया कि रामनरेश अपनी पत्नी के साथ कानपुर में अपने ससुर के अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे थे। सफर के दौरान हुए इस हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। थाना प्रभारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह बस चालक की लापरवाही सामने आई है। मामले की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
आरोप सही : जहरीले अपशिष्ट से 12 लाख की मछलियां मरीं, एफआईआर के आदेश
Sat, Jul 11, 2026
लैब जांच में तालाब का पानी दूषित मिला, विभागीय जांच में शिकायत सही पाई गई
उन्नाव। आसीवन क्षेत्र के एक बड़े मत्स्य पालन तालाब में जहरीला अपशिष्ट डाले जाने का मामला जांच में सही पाए जाने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। विभागीय जांच और लैब रिपोर्ट के आधार पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही उससे मछली पालक को हुए नुकसान की भरपाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। घटना में करीब 12 लाख रुपये की मछलियों के मरने का अनुमान लगाया गया है। आसीवन थाना क्षेत्र के गांव आसीवन तरफ पश्चिम स्थित करीब सात बीघे का तालाब प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत विकसित किया गया है। स्थानीय लोगों के बीच यह तालाब "गढ़ा" के नाम से जाना जाता है। यहां चरी योजना के तहत नर और मादा मछलियों का संरक्षण कर पूरे वर्ष प्रजनन कराया जाता है। यही तालाब अब जहरीले अपशिष्ट की वजह से भारी नुकसान का शिकार हो गया। मत्स्य पालक सैफुर्रहमान सफवी ने तीन जुलाई को जिलाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को शिकायत देकर बताया था कि तालाब से सटे प्लॉट के मालिक मुजफ्फरपुर सर्रा निवासी दिलीप सिंह अपने प्लॉट में बाहर से जहरीला औद्योगिक अपशिष्ट मंगवाकर डंप करा रहे थे। विरोध करने के बावजूद काम नहीं रोका गया और वही अपशिष्ट तालाब तक पहुंच गया। इसके बाद तालाब का पानी दूषित हो गया, जिससे 80 से 90 क्विंटल मछलियां मर गईं। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने तालाब के पानी का नमूना जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा। रिपोर्ट में पानी में दूषित अपशिष्ट मिलने की पुष्टि हुई। इसके साथ ही मत्स्य पालन विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों के बयान भी दर्ज किए। विभागीय जांच में भी शिकायत सही पाई गई। शुक्रवार को मत्स्य पालक विकास अभिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बालकिशोर दुबे ने आसीवन थाना प्रभारी को पत्र भेजकर आरोपी दिलीप सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और मछली पालक को हुए आर्थिक नुकसान की क्षतिपूर्ति कराने की संस्तुति की। वहीं मत्स्य पालन अधिकारी ने डीपीआरओ और एसडीएम हसनगंज को भी पत्र भेजकर नियमानुसार कार्रवाई करने की सिफारिश की है। जांच में मामला सही पाए जाने के बाद अब पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई शुरू होने की उम्मीद है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपी के खिलाफ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और आर्थिक क्षति पहुंचाने से जुड़े प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
कार्रवाई : मवेशियों से भरी पांच गाड़ियों के मामले में तीन पर एफआईआर
Sat, Jul 11, 2026
जूना अखाड़े के स्वामी की सूचना के बाद पशु क्रूरता अधिनियम में दर्ज हुआ मुकदमा
उन्नाव। कानपुर-लखनऊ हाईवे पर मवेशियों से भरी पांच गाड़ियों को पकड़े जाने के मामले में पुलिस ने आखिरकार मुकदमा दर्ज कर लिया है। बृजवासी गौ रक्षक सेवा के प्रदेश उपाध्यक्ष की तहरीर पर तीन लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है। गुरुवार को सदर कोतवाली क्षेत्र के गदनखेड़ा बाईपास पर गुजरात के जूना अखाड़े के स्वामी चंद्रानंदन गिरी ने अपने सेवकों के साथ मवेशियों से लदी पांच गाड़ियों को रुकवाया था। पूछताछ के दौरान चालकों ने बताया था कि मवेशियों को अलग-अलग स्थानों से लाकर स्लॉटर हाउस ले जाया जा रहा है। इसके बाद मौके पर काफी देर तक हंगामा हुआ और पुलिस को बुलाया गया। पुलिस की मौजूदगी में बृजवासी गौ रक्षक सेवा के प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गेश पांडेय ने वाहनों में लदे मवेशियों की गिनती कराई। पांचों गाड़ियों से कुल 31 मवेशी मिले। इनमें पहली गाड़ी में दो, दूसरी में तीन, तीसरी में सात, चौथी में दो और पांचवीं गाड़ी में 17 मवेशी थे। घटना के बाद देर रात दुर्गेश पांडेय की तहरीर पर पुलिस ने कानपुर के बेकनगंज निवासी हसीन अहमद, कानपुर देहात के महराजपुर थाना क्षेत्र के धमना गांव निवासी हफीज तथा मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव निवासी सोमा आदिवासी के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया।
एक खेप या बड़ा नेटवर्क
मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब जांच इस बात पर भी केंद्रित होनी चाहिए कि इन मवेशियों की सप्लाई किस नेटवर्क के जरिए की जा रही थी। क्या यह एक अकेली खेप थी या इसके पीछे लगातार चलने वाली कोई संगठित व्यवस्था है? जांच से ही इन सवालों के जवाब सामने आएंगे।
स्वामी ने रोका तो खुला मामला, पहले कौन देख रहा था
गदनखेड़ा बाईपास पर जूना अखाड़े के स्वामी चंद्रानंदन गिरी ने गाड़ियां रुकवाईं, तब 31 मवेशियों से भरे पांच वाहन सामने आए। सवाल यह है कि यदि ये वाहन नहीं रोके जाते तो क्या मामला सामने आ पाता? इससे यह भी सवाल खड़ा होता है कि जनपद में प्रवेश के बाद हाईवे पर मवेशियों के परिवहन की निगरानी कितनी प्रभावी है और यह सिर्फ एक मामला था या फिर रोज़ाना पशु क्रूरता के ऐसे मामले बिना कार्रवाई के गुजरते हैं।
इंट्री के बाद भी कैसे निकल गईं पांच गाड़ियां
जनपद की सीमा में प्रवेश करने के बाद मवेशियों से भरी पांच गाड़ियां हाईवे पर काफी दूरी तक चलती रहीं, लेकिन कार्रवाई तब हुई जब उन्हें गदनखेड़ा बाईपास पर रोका गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या रास्ते में कहीं इन वाहनों की जांच नहीं हुई या कोई सूचना संबंधित टीमों तक नहीं पहुंची। जांच में इस पहलू की भी पड़ताल जरूरी है कि निगरानी व्यवस्था में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।
जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
सीओ सिटी विनी सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।