: सज गई बकरों की मंडी, दिख रही खरीदारों की भीड़
Wed, Jun 4, 2025
बकरीद की तैयारियां शुरू, 7 जून को होगी कुर्बानी
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान✍️
उन्नाव। ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार 7 जून शनिवार को मनाया जाएगा। वहीं, बकरीद की कुर्बानी को लेकर शहरभर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। बाजारों में चहल-पहल तेज हो गई है। शहर के किला बाजार में बुधवार को कुर्बानी के जानवरों की खरीदारी के लिए भीड़ देखने को मिली। साथ ही धवनरोड पर लोग नए कपड़ों की खरीदारी करते दिख रहे हैं।
पशु विक्रेताओं ने बताया कि वे कई वर्षों से इस मौके पर बाजार में बकरों की बिक्री करते आ रहे हैं। इस वर्ष भी वे कुर्बानी के लिए 12 हजार से 25 हजार रुपये तक के जानवर लेकर आए हैं। उन्होंने बताया कि खरीदार लगातार आ रहे हैं और पूछताछ करने के बाद खरीदारी भी कर रहे हैं। विक्रेता रामनरेश और मो. शाकिब ने बताया कि ग्राहक आमतौर पर बड़े और भारी बकरों की डिमांड लेकर आ रहे हैं। अधिकतर खरीदार कम दाम में ज्यादा वजन वाले जानवर की तलाश करते हैं।
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शहर काज़ी: मौलाना निसार अहमद मिस्बाही
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उधर, शहर काज़ी मौलाना निसार अहमद मिसबाही ने बताया कि ईद-उल-अजहा (बकरीद) हमें उन कुर्बानियों की याद दिलाती है जो अल्लाह के बरगुज़ीदा नबी हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के हुक्म की तामील में पेश की थीं। उन्होंने कहा कि बकरीद के दिन दुनिया भर के मुसलमान अपने माल, जान, ख्वाहिशों और मफ़ादात को अल्लाह की रज़ा के लिए कुर्बान करने का जज्बा अपनाते हैं। यह मुकद्दस त्योहार केवल कुर्बानी का नहीं, बल्कि आपसी मोहब्बत, भाईचारा, बराबरी का भी पैगाम देता है। उन्होंने अपील की कि बकरीद के मौके पर जिला प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइंस का पूरी तरह से पालन किया जाए।
: आवारा पशुओं की लड़ाई में युवक को गंवानी पड़ी अपनी जान, कौन जिम्मेदार ?
Sat, May 31, 2025
छुट्टा पशुओं को घूमने की कवायद कागजी,
सड़कों पर घूम रहें
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान ✍️
उन्नाव। शहर में घूम रहे आवारा पशु मानव जीवन के लिए खतरा बने हुए है, लेकिन इस खतरे को जिम्मेदार भांप नहीं रहे। ऐसे में रोज हादसे हो रहे है। जिम्मेदारों की इस लापरवाही के चलते आज यानि शनिवार को एक व्यक्ति की जान चली गई। दिल दहलाने वाले हमले का वीडियो भी सोशल मीडिया में सामने आया है। जिसके बाद लोगों में प्रशासन के प्रति नाराज़गी और चिंता सताने लगी है। घटना शहर के मोहल्ला गांधी नगर के पास की है, जहां दो पशुओं की लड़ाई में सदर कोतवाली क्षेत्र के गांधीनगर निवासी सुशील बाजपेयी (40) पुत्र सतीश बाजपेयी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिला अस्पताल में सुशील को भर्ती करवाया, जहां इलाज के दौरान सुशील की मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा कराकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
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पूरा मामला
जानकारी के अनुसार शनिवार दोपहर को सुशील अपने भतीजे शुभम के साथ किसी काम से गुजर रहे थे। तभी दो पशुओं की लड़ाई में से एक गाय ने उनपर अचानक से हमला कर दिया। जबतक सुशील खुद को बचाते गुस्सायी पशु ने उनको कई बार पटका व पैरों से कुचल दिया। इसी बीच भतीजे ने सुशील को बचाने की कोशिश किया तो गुस्साए पशु ने उस पर भी हमला करके घायल कर दिया। चीख पुकार की आवाज से आए क्षेत्रवासियों ने किसी तरह पशु को वहां से भगाया। और एंबुलेंस बुलाकर सुशील को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। गंभीर हालत में पहुंचे सुशील की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही जिला अस्पताल पहुंचें परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। अस्पताल प्रशासन ने घटना की जानकारी पुलिस को दी कोतवाली प्रभारी अवनीश सिंह ने बताया कि शव का पंचनामा करवा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
परिजनों का रो रोकर बुरा हाल
मृतक की पत्नी रागनी के मुताबिक उसका पति फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करते थे। उसका एक बेटा अंकित है। इधर, परिजनों और क्षेत्रीय लोगों में छुट्टा घूम रहे पशुओं के प्रति पालिका प्रशासन और स्थानीय के खिलाफ काफी गुस्सा है। क्षेत्रवासियों ने स्थानीय प्रशासन से आवारा पशुओं को पकड़ने की मांग भी की है।
जिम्मेदार कौन
ऐसे में सवाल उठता है, इस सुशील की मौत का जिम्म्दार कौन है? शायद ही किसी के पास इसका कोई जवाब होगा। दरअसल शहर में जगह-जगह आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा हुआ है। हर दिन भरे बाजार में पशुओं की लड़ाई में नुकसान हो रहा है, यहां तक की लोग इस लापरवाही के शिकार हो रहे है। कई बार आवारा पशु लड़ते-लड़ते दुकान या प्रतिष्ठान में घुस जाते है। जिससे न केवल नुकसान होता है बल्कि यातायात भी पूरी तरह बाधित हो जाता है। इतना सब होते हुए भी प्रशासन द्वारा इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। पिछले लंबे समय से शहर में आवारा पशुओं को पकड़ा नहीं जा रहा, जिसके कारण शहर में आवारा पशुओं की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। प्रशासन की इस लापरवाही के चलते आए दिन खुल्ला घूम रहे पशुओं से कोई न कोई शिकार हो रहे है।
प्रशासन के दावे सिर्फ काग़जी
यह छुट्टा पशु किस पर हमला कर दें यह किसी को अंदाजा नहीं होता। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से भी इन पशुओं को संरक्षित करने के आदेश दिए जा चुके है। लेकिन जिला प्रशासन की ओर से छुट्टा पशुओं को गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित करने के दावे सिर्फ कागजी निकले। अभी भी शहर के सड़कों व अन्य जगहों पर छुट्टा पशु लोगों की जान के दुश्मन बने हुए है। इनके कारण पहले भी कई बार हादसे भी हो चुके है।
: मानवता के मिसाल बनें इंस्पेक्टर सुब्रत नारायण तिवारी, मासूम मृतका के परिवार की आर्थिक मदद
Tue, May 27, 2025
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान✍️
उन्नाव। धर्मशास्त्र और साधु संत शिक्षा देते हैं कि मनुष्य को अपने जीवन में सबकी मदद करनी चाहिए। परोपकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म होता है। जीव, जंतु आदि को पीड़ा देना सबसे बड़ा अधर्म होता है, और किसी असहाय और आर्थिक रुप से कमजोरों के मददगार बनने से पूण्य लाभ अर्जित होता है। ऐसा ही यूपी पुलिस के एक अफसर ने मानवता की मिसाल पेश की है। वैसे पुलिस का नाम जुबां पर आते ही मानस पटल पर एक नकारात्मक छवि उभर आती है, पर कभी-कभी इस खाकी वर्दी मे छुपा मानवीय चेहरा भी समाज के सामने आ जाता है। उन्नाव जिले के सफीपुर कोतवाली के इंस्पेक्टर सुब्रत नारायण तिवारी जो कि अपराध व अपराधियों के खिलाफ सख्ती में कोई कमी नही छोड़ते वहीं उनकी खाकी वर्दी के नीचे छुपे संवेदनशील हृदय की जितनी तारीफ़ की जाए कम है।
दरअसल, मामला 22 अप्रैल का है, जब कोतवाली क्षेत्र के नैनीखेड़ा मजरा ओसियां निवासी संजय पुत्र कल्लू की 6 वर्षीय मासूम बेटी एक पिकअप लोडर की चपेट में आकर दर्दनाक हादसे में मौत का शिकार हो गई थी। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। आर्थिक रूप से निर्धन यह परिवार बेटी की असमय मौत से टूट चुका था।
कोतवाली प्रभारी सुब्रत नारायण तिवारी ने इस घटना से प्रभावित होकर मानवता का परिचय देते हुए पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान का संकल्प लिया था। एक माह बाद यानि आज मंगलवार को उन्होंने पूर्व ग्राम प्रधान दिनेश सिंह की उपस्थिति में यह राशि सौंपी और परिवार को ढांढस बंधाया।
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एसपी उन्नाव: दीपक भूकर
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कप्तान दीपक भूकर से मिली प्रेरणा
इंस्पेक्टर सुब्रत नारायण तिवारी का कहना है कि इस काम की प्रेरणा जिले के कप्तान दीपक भूकर से मिली है। कप्तान साहब ने हर थाने में एक आर्थिक सहायता फंड दे रखा है जो बच्चियों महिलाओं को आर्थिक मदद के रुप में किया जाता है जिसका उद्देश्य जरूरतमंद और गरीब लोगों को मदद पहुंचाना है। इस फंड में जमा किए गए धन का उपयोग विभिन्न सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के लिए भी किया जाता है। सुब्रत नारायण अपना प्रेरणाश्रोत एसपी दीपक भूकर को मानते हुए कहते है कि अपराधियों को सलाखों के पीछे होना चाहिए और निर्दोष व जरुरतमंदों की हर संभव मदद के लिए खड़े होना चाहिए।
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हरदोई में जनसुनवाई के दौरान पीड़ित छात्रा की थी मदद
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हरदोई में तैनाती के दौरान छात्रा की थी मदद
इंस्पेक्टर सुब्रत नारायण पहले भी लोगों की मदद का परिचय दे चुके है बातचीत के दौरान उन्होनें बताया कि 2022 में हरदोई जिले के माधौगंज में तैनाती के दौेरान जहां जनसुनवाई के बीच थाने पर एमएस पब्लिक स्कूल की एक 9 वीं क्लास की छात्रा संध्या पहुंची और उनके सामने फफक कर रोने लगी थी। सुब्रत नारायण ने जब उससे रोने का कारण पूछा तो उसने बताया कि दुकानदार ने किताब के दाम अधिक वसूल लिए है। बुक डिपो से उसने भौतिक विज्ञान की किताब खरीदी थी जो दुकानदार ने 850 रुपए की दी, जबकि बाकी दुकानों पर वो किताब 765 रुपए की है। जब उसने दुकादार से कहा, तो उसने न तो उसके रुपए लौटाए और न ही किताब दी। साथ ही दुकानदार ने कहा कि वो जो चाहे कर ले वो उसको किताब नहीं देगा। जिसके बाद संध्या थाने पहुंची और रोते हुए सारी कहानी सुनाने के बाद बोली कि उसने किताब में पढ़ा है कि उपभोक्ता के अधिकार होते है उसको वो अधिकार दिलाए जाएं। छात्रा संध्या ने सुब्रत नारायण को बताया कि उसके पिता मजदूरी करके बड़ी मेहनत से उसे पढ़ा रहे हैं। उसकी चप्पल टूटी हुई है जिसे उसने 5 रुपए देकर जुड़वाया है। ड्रेस भी फट गई है और ऐसे में पढ़ाई करना बहुत मुश्किल है। इस बारे में थानाध्यक्ष सुब्रत नारायण तिवारी ने बताया कि बच्ची की शिकायत के बाद महिला आरक्षी दिव्या द्विवेदी व प्रगति दुबे को दुकानदार के पास भेजा गया। दोनों महिला आरक्षियों ने दुकानदार से अधिक रुपए लेने की बात पूछी तो दुकानदार ने गलती स्वीकार करते हुए रुपए वापस किए। इसके अलावा पैरों में टूटी चप्पल पहने होने पर थानाध्यक्ष ने एक हजार रुपए देकर उसको नई चप्पलें और किताबें भी दिलाई थी। उसी के बाद उनके मन में आया कि क्यों न वह भी कुछ ऐसा करें जिससे दूसरों का दर्द कम हो। उन्होंने लोगों की निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद करने लगे।
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सफीपुर कोतवाली प्रभारी: सुब्रत नारायण तिवारी
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अपनी सैलरी से करते हैं मदद
सुब्रत नारायण ने बताया कि वह अपनी सैलरी से लोगों की सेवा करने के लिए भी खर्च करते हैं और विभाग और कुछ उनके साथी भी इस काम में मदद कर देते हैं। लोगों की सेवा करने में खर्च की कोई गिनती नहीं है। ऊपर वाले की दया से सब ठीक होता चला जाता है।
कोतवाल ने कहा कि यह मदद मृतका मासूम के परिवार की आर्थिक रुप से कमजोर पीड़ित परिवार के जीवनयापन में कुछ हद तक सहायक हो सके, यही उनका उद्देश्य है। उन्होंने आश्वासन भी दिया कि भविष्य में भी परिवार को हरसंभव सहायता दी जाएगी।
संवेदनशील पहल की चारो ओर हो रही प्रशंसा
कोतवाली प्रभारी सुब्रत नारायण की इस संवेदनशील पहल की चारों ओर प्रशंसा हो रही है। आमतौर पर पुलिस विभाग को कठोर छवि के रूप में देखा जाता है, लेकिन कोतवाल तिवारी की यह पहल उनके मानवीय पक्ष को उजागर करती है। क्षेत्रीय लोगों ने भी उनके इस कदम की भूरी-भूरी प्रशंसा की और कहा कि ऐसे अधिकारी समाज के लिए प्रेरणा हैं। इस घटना के बाद कोतवाल की कार्यशैली व उनका संवेदनशील व्यवहार चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि यदि हर अधिकारी इस तरह मानवीयता दिखाए तो समाज में पीड़ितों को वास्तविक राहत मिल सकती है।