शिवपाल के दौरे में सपा की दो तस्वीरें : स्वागत में उमड़े कार्यकर्ता, बड़े चेहरे रहे नदारद
Sat, Oct 31, 2026
जिलास्तर के कई प्रमुख पदाधिकारी और बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी चर्चा में
2027 के चुनाव से पहले संगठन की एकजुटता पर उठे सवाल
उन्नाव। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव के शुक्रवार को उन्नाव दौरे में पार्टी की दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलीं। एक ओर उनके स्वागत में कार्यकर्ताओं और समर्थकों का हुजूम उमड़ा तो दूसरी ओर जिले के कई प्रमुख चेहरे और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारी नदारद रहे। खास बात यह रही कि पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता के दौरे में जिलास्तर के संगठन की अपेक्षित सक्रियता नजर नहीं आई। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच संगठन के बड़े पदाधिकारियों की गैरमौजूदगी ने पार्टी की एकजुटता और स्थानीय नेतृत्व की सक्रियता को लेकर सवाल खड़े कर दिए।सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के भाई और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव का पार्टी में बड़ा कद माना जाता है। ऐसे में उनके जिले में आगमन पर संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों की मौजूदगी को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा था। हालांकि उनका दौरा पार्टी के किसी आधिकारिक संगठनात्मक कार्यक्रम के बजाय मंदिर दर्शन और क्षेत्रीय भ्रमण का था, लेकिन चुनावी माहौल को देखते हुए संगठन के बड़े चेहरों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। पार्टी के अंदरखाने में नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के बाद से संगठनात्मक तालमेल को लेकर सब कुछ सामान्य नहीं होने की चर्चाएं भी हैं। ऐसे में शिवपाल के दौरे में प्रमुख पदाधिकारियों का नजर नहीं आना इन चर्चाओं को और हवा देता दिखा। सवाल यह भी है कि जब विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है तो जिले में संगठन को एकजुट और सक्रिय करने की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है। शिवपाल सिंह यादव शुक्रवार को बक्सर स्थित सिद्धपीठ मां चंद्रिका देवी मंदिर पहुंचे। दर्शन-पूजन के बाद वह पुरवा और भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से होते हुए मौरावां के मोतेश्वर मंदिर पहुंचे। पुरवा में पूर्व विधायक उदयराज यादव ने सैकड़ो समर्थकों के साथ उनका स्वागत किया। मौरावां में भी समर्थकों ने अभिनंदन किया। इस दौरान पूर्व विधायक उदयराज यादव ने शिवपाल को गदा, चांदी का मुकुट और तलवार भेंट की।
भाजपा को बताया लुटेरी सरकार
मीडिया से बातचीत में शिवपाल ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए उसे लुटेरी सरकार बताया। उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा और इंडिया गठबंधन मिलकर चुनाव लड़ेगा। कार्यकर्ताओं से भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए अभी से तैयारी में जुटने की अपील की। कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे पर उन्होंने कहा कि इस पर अंतिम फैसला दोनों दलों का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा।
गुजरात के ठेकेदारों को बड़े काम मिलने का आरोप
शिवपाल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास कार्यों के बड़े ठेके गुजरात के व्यापारियों और ठेकेदारों को दिए जा रहे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के लोगों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने बजट के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा सरकार में बिना पैसे के काम नहीं होता। सपा सरकार के कार्यकाल में बक्सर-गढ़ेवा मार्ग पर गंगा और पांडु नदी पर पुल निर्माण सहित कराए गए विकास कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने गढ़ेवा पुल के लंबे समय से क्षतिग्रस्त होने का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
विधान परिषद चुनाव में सपा की हार पर शिवपाल ने शासन-प्रशासन पर बेईमानी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव में गड़बड़ी न हुई होती तो सपा 11 सीटें जीतती। उनके मुताबिक, कम से कम तीन सीटों पर पार्टी को नुकसान हुआ। उन्होंने 2027 का विधानसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग दोहराई। साथ ही प्रदेश में 28 हजार स्कूल बंद होने का दावा करते हुए शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
जमीन के सौदे में हुआ फरेब : 14 लाख एडवांस लेकर दूसरे को बेची
Fri, Oct 30, 2026
पहले एग्रीमेंट में गवाह था दूसरा खरीदार, कोर्ट के आदेश पर सदर कोतवाली में एफआईआर
उन्नाव। जमीन की खरीद-फरोख्त में सदर तहसील के तौरा गांव का एक मामला सामने आया है। आरोप है कि जमीन का सौदा लखनऊ की एक कंपनी से 28 लाख 18 हजार रुपये में तय हुआ था। कंपनी ने 14 लाख नौ हजार रुपये एडवांस भी दे दिए, लेकिन बाद में जमीन कंपनी के नाम करने के बजाय दूसरे व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री कर दी गई। खास बात यह है कि दूसरे खरीदार ने पहले हुए एग्रीमेंट में गवाह के तौर पर हस्ताक्षर किए थे। कंपनी की शिकायत पर न्यायालय के आदेश से सदर कोतवाली पुलिस ने 30 अक्टूबर को दोनों आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। लखनऊ डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर सौरभ शर्मा की शिकायत के मुताबिक, बिजनौर के नजीबाबाद क्षेत्र के निवासी विमल कुमार वर्तमान में गोमती नगर, लखनऊ में रहते हैं। उन्होंने पांच जुलाई 2025 को तौरा गांव की जमीन का कंपनी के साथ रजिस्टर्ड एग्रीमेंट किया था। जमीन की कुल कीमत 28 लाख 18 हजार रुपये तय हुई थी। एग्रीमेंट के समय कंपनी ने बैंक ऑफ इंडिया की बंथरा शाखा के बैंकर्स चेक से विमल कुमार को 14 लाख नौ हजार रुपये एडवांस दिए थे। बाकी रकम रजिस्ट्री के समय दी जानी थी।
अनुमति मिलने के बाद भी नहीं की रजिस्ट्री
शिकायत के अनुसार, विमल कुमार अनुसूचित जाति वर्ग से होने के कारण जमीन बेचने के लिए डीएम की अनुमति जरूरी थी। एग्रीमेंट में शर्त थी कि अनुमति मिलने के दो महीने के भीतर कंपनी के नाम रजिस्ट्री कराई जाएगी। विमल कुमार को 30 जनवरी 2026 को जमीन बेचने की अनुमति मिल गई थी। इसके बावजूद कंपनी के नाम रजिस्ट्री नहीं कराई गई। कंपनी ने एक मार्च 2026 को अधिवक्ता के जरिए कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन आरोप है कि इसका पालन नहीं किया गया।
एग्रीमेंट का गवाह ही बना दूसरा खरीदार
कंपनी की शिकायत में सुधीर कुमार की भूमिका भी अहम है। पांच जुलाई 2025 को विमल कुमार और कंपनी के बीच हुए पंजीकृत एग्रीमेंट में सुधीर कुमार गवाह नंबर दो थे। कंपनी का आरोप है कि उन्हें पहले सौदे और एडवांस भुगतान की जानकारी थी। इसके बावजूद विमल कुमार ने 28 फरवरी 2026 को जमीन सुधीर कुमार के नाम रजिस्ट्री कर दी। कंपनी ने दोनों पर मिलीभगत कर 14 लाख नौ हजार रुपये हड़पने और आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। न्यायालय के आदेश पर सदर कोतवाली पुलिस ने 30 अक्टूबर को दोनों आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वन भूमि से निजी जमीन तक खनन का खेल : रात के अंधेरे में खोद डाली जमीन
Fri, Oct 30, 2026
मवइय्या वन ब्लॉक में 36 मीटर तक हुई खुदाई, वन रक्षक की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज
उन्नाव। रात का अंधेरा और सरकारी जमीन, अवैध खनन करने वालों के लिए यही मौका बना। माखी क्षेत्र के मवइय्या वन ब्लॉक में खनन करने वालों ने संरक्षित वन भूमि को ही नहीं छोड़ा। रातोंरात यहां मिट्टी की खुदाई कर दी गई। वन विभाग की गश्त के दौरान इसका खुलासा हुआ तो विभाग में खलबली मच गई। वन रक्षक की तहरीर पर माखी पुलिस ने भारतीय वन अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। वन रक्षक अनुजा यादव के मुताबिक, 27 अक्टूबर की शाम वह मवइय्या वन ब्लॉक की वन भूमि पर गश्त कर रही थीं। इस दौरान संरक्षित क्षेत्र में करीब 36 मीटर लंबाई, छह मीटर चौड़ाई और 0.66 मीटर गहराई तक मिट्टी की खुदाई मिली। आसपास जानकारी करने पर पता चला कि 26 और 27 अक्टूबर की रात के बीच खनन किया गया है।वन रक्षक ने तहरीर में बताया कि खनन किसने किया और खोदी गई मिट्टी कहां ले जाई गई, इसकी जानकारी नहीं हो सकी। संरक्षित वन क्षेत्र में बिना अनुमति की गई इस खुदाई को गंभीर मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई। माखी पुलिस ने 29 अक्टूबर को भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। अब सवाल यह है कि संरक्षित वन भूमि तक पहुंचकर रात में खुदाई करने वाले कौन थे और निकाली गई मिट्टी कहां खपाई गई। जांच में इन सवालों के जवाब सामने आने बाकी हैं।
शिकायतें लगातार, खनन पर लगाम नहीं
जिले में अवैध मिट्टी खनन की शिकायतें सोशल मीडिया पर लगातार सामने आती रहती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से लोग मिट्टी की अवैध कारोबार की तस्वीरें,वीडियो और यहां तक लोकेशन तक साझा कर प्रशासन का ध्यान भी आकर्षित करते हैं। इसके बावजूद खनन पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। रात के अंधेरे में सरकारी विभागों की जमीनों के साथ निजी भूमि को भी निशाना बनाया जा रहा है। हाल ही में बिहार थाना क्षेत्र के भगवंतनगर में भाजपा सुमेरपुर मंडल अध्यक्ष आशीष कुमार बाबा की निजी जमीन से मिट्टी खोदे जाने का मामला सामने आया। आशीष कुमार के मुताबिक, 21 अक्टूबर की रात गाटा संख्या 383 स्थित उनकी जमीन से जेसीबी और ट्रैक्टर की मदद से मिट्टी खुदवाई गई और उसे आसपास के गांवों में बेच दिया गया। भाजपा नेता की शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी। अब मवइय्या वन ब्लॉक की संरक्षित भूमि पर खनन का मामला सामने आने से अवैध खनन के कारोबार पर अंकुश लगाने और जिम्मेदारों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।