पैतृक मकान पर कब्जे का विरोध : कुल्हाड़ी से काटने की भी दी धमकी; नामजद रिपोर्ट दर्ज
Wed, Sep 9, 2026
फावड़ा-कुल्हाड़ी लेकर धक्का-मुक्की, छह फीट गहरे गड्ढे में दफनाने की धमकी
उन्नाव। अजगैन थाना क्षेत्र के सरोसा गांव में पैतृक मकान और जमीन पर कथित कब्जे का विरोध करने पर एक व्यक्ति के साथ गालीगलौज और धक्का-मुक्की किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि विरोध करने पर दो लोगों ने फावड़ा, कुल्हाड़ी और डंडा लेकर उसे धमकाया। दोबारा गांव में दिखाई देने पर कुल्हाड़ी से काटकर छह फीट गहरे गड्ढे में दफनाने की धमकी देने का भी आरोप है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गांधी नगर निवासी अवधेश कुमार सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनका पैतृक गांव सरोसा है। उनके पिता स्व. शिव प्रताप सिंह का गांव में पुराना कच्चा मकान था। पांच सितंबर की दोपहर करीब एक बजे वह अपने पैतृक मकान पर पहुंचे। वहां अजीत सिंह और रंजीत सिंह पुत्रगण मुन्ना सिंह, उनकी पत्नी और कुछ अन्य लोग मौजूद थे। अवधेश का आरोप है कि आरोपियों ने मकान के करीब आधे आंगन में कच्चा मकान बनाकर कब्जा कर लिया है। शेष खाली जमीन पर भी कब्जा किया हुआ है। जब उन्होंने इस संबंध में आरोपियों से बात की तो वे गालीगलौज करने लगे। विरोध करने पर अजीत और रंजीत फावड़ा, कुल्हाड़ी और डंडा लेकर बाहर आ गए और धक्का-मुक्की करने लगे। आरोप है कि इस दौरान आरोपियों ने जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि दोबारा यहां दिखाई दिए तो कुल्हाड़ी से काटकर छह फीट गहरे गड्ढे में दफना देंगे। साथ ही पुलिस द्वारा उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाने की बात कहकर धमकाया। पीड़ित ने पुलिस को घटना से संबंधित कुछ वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने की बात भी बताई है। उसने अपने और परिवार के जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है। पुलिस ने अजीत सिंह, रंजीत सिंह, मुन्ना सिंह की पत्नी और कुछ अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
डीपीआरओ दफ्तर में नौकरी का झांसा : छह लाख हड़पे
Wed, Sep 9, 2026
दो साल में रकम लेने का आरोप, पीड़ित ने थाने पहुंचकर दर्ज कराया मुकदमा
उन्नाव। डीपीआरओ कार्यालय में नौकरी लगवाने का झांसा देकर छह लाख रुपये लेने और रकम वापस मांगने पर गालीगलौज व जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए युवक ने अचलगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। ग्राम जमुका निवासी आदित्य चौरसिया ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि रंजीत सिंह निवासी अज्ञात ने उससे 16 फरवरी 2024 से 29 जनवरी 2026 के बीच नौकरी लगवाने के नाम पर करीब छह लाख रुपये लिए। आरोप है कि रकम रंजीत ने अपने और अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कराने के साथ ही नगद भी ली। आदित्य के मुताबिक, उसके पास रकम दिए जाने से संबंधित पूरी जानकारी और विवरण मौजूद है। आरोप है कि 13 जून 2025 को दोपहर करीब एक बजे रंजीत अपने कुछ सहयोगियों के साथ उसके घर पहुंचा और वहां से भी डेढ़ लाख रुपये नगद ले गया। इसके बावजूद न तो नौकरी लगवाई गई और न ही रकम वापस की गई। पीड़ित का कहना है कि वह कई महीनों से अपनी रकम वापस मांग रहा है। आरोप है कि रुपये मांगने पर रंजीत गालीगलौज करने लगा और जान से मारने की धमकी दी। परेशान होकर आदित्य ने आठ सितंबर को अचलगंज थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मिट्टी के अखाड़े में दांव-पेच : आल्हा ने जगाई वीरता की याद
Tue, Sep 8, 2026
बारा के महावीर बाबा मंदिर में जुटी भीड़, भाजपा नेता अविचल शुक्ला ने ग्रामीणों से की मुलाकात
उन्नाव। बीघापुर ब्लॉक के बारा गांव में महावीर बाबा मंदिर परिसर रविवार को वीरता और लोक संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। मंदिर परिसर में आयोजित दंगल में पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर एक-दूसरे को जोरदार पटखनी देने के लिए दांव-पेच आजमाए। वहीं, आल्हा गायन ने माहौल में जोश भर दिया।कार्यक्रम में भाजपा नेता अविचल शुक्ला भी पहुंचे। उन्होंने दंगल में पहलवानों के मुकाबले देखे और आल्हा गायन का आनंद लिया। आयोजन में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग और श्रद्धालु मौजूद रहे। पारंपरिक दंगल और आल्हा गायन को लेकर लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया। अविचल शुक्ला ने इस दौरान ग्रामीणों और श्रद्धालुओं से बातचीत कर उनका हाल जाना। लोगों ने भी उनसे स्थानीय मुद्दों और क्षेत्र से जुड़े विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गांवों में होने वाले ऐसे आयोजन हमारी पुरानी परंपराओं और लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम करते हैं। दंगल जैसी प्रतियोगिताएं युवाओं को अपनी मिट्टी और परंपरा से जोड़ती हैं।कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सेवा समिति बारा-उन्नाव से जुड़े आयोजकों और कार्यकर्ताओं का सफल आयोजन के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की भागीदारी से ऐसे आयोजन और भी खास बन जाते हैं।