नबी की आमद पर सजा उन्नाव : मोहब्बत के पैगाम के साथ निकला जुलूस-ए-मोहम्मदिया
सैय्यद फैज़ान शीबू रहमान
Wed, Aug 26, 2026
परचम कुशाई के बाद जामा मस्जिद से शुरू हुआ जुलूस, नातों और नारों से गूंजता रहा शहर
उन्नाव। 12 रबीउल अव्वल को इस्लाम के आखिरी नबी पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा साहब की आमद की खुशी में बुधवार को शहर में जश्न-ए-मिलादुन्नबी का माहौल रहा। इस मौके पर मरकज सीरत कमेटी के बैनर तले जुलूस-ए-मोहम्मदिया निकाला गया। इसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। नात-ए-पाक, सलाम और नारों से शहर की गलियां गूंजती रहीं। मंगलवार रात से ही मोहल्लों, गलियों, घरों, मस्जिदों और प्रमुख स्थानों को आकर्षक रोशनी से सजाया गया था। जुलूस से पहले जामा मस्जिद में परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। इस दौरान मौलाना फैज हसन सफवी, मौलाना नईम, हाफिज शफीक, कारी नजमुद्दीन और मौलाना शुएब समेत उलेमा और अन्य लोग मौजूद रहे। शहर काजी मौलाना निसार अहमद मिस्बाही ने तकरीर करते हुए पैगंबर मोहम्मद साहब की शिक्षाओं पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि अल्लाह के नबी और उनके सहाबा से मोहब्बत ईमान का अहम हिस्सा है। लोगों से अमन, भाईचारे, इंसानियत और नेक आमाल की राह पर चलने की अपील की। परचम बुलंद होते ही मौजूद अकीदतमंदों ने हाथों में लिए झंडे ऊंचे कर दिए। नारे-ए-तकबीर और नारे-ए-रिसालत से जामा मस्जिद का परिसर गूंज उठा। कमेटी की ओर से तराना भी पेश किया गया।
नातों के साथ आगे बढ़ा जुलूस
जामा मस्जिद से जुलूस-ए-मोहम्मदिया की शुरुआत हुई। सबसे आगे उलेमा और बुजुर्ग चल रहे थे। उनके पीछे विभिन्न अंजुमनों के लोग झंडे लेकर शामिल हुए। दावते इस्लामी के सदस्यों ने नात-ए-पाक पढ़ते हुए नमाज, नेक अमल और भाईचारे का संदेश दिया। मरकज सीरत कमेटी के बैनर तले मुईन-उल हक फारुकी, अतहर अली लाले, जियाउद्दीन सिद्दीकी, अफजाल अहमद और काशिफ शाह समेत कमेटी से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भूमिका रही। सभी ने जुलूस को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने में सहयोग किया। जुलूस जामा मस्जिद से छोटा चौराहा, बड़ा चौराहा, धवन रोड, दादामियां चौराहा कहारों का अड्डा, कंजी और तालिब सरायं होते हुए किला मैदान पहुंचा। निर्धारित समय से करीब दो घंटे की देरी से जुलूस शुरू हुआ, लेकिन अकीदतमंदों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दी।
कहीं शरबत, कहीं बिरयानी, फूलों से हुआ स्वागत
जुलूस के स्वागत के लिए पूरे मार्ग पर विशेष इंतजाम किए गए थे। जगह-जगह सबील लगाकर ठंडा पानी और शरबत बांटा गया। कई स्थानों पर हलवा, पूड़ी, बिरयानी समेत अन्य खाद्य सामग्री वितरित की गई। जुलूस में शामिल लोगों पर फूल बरसाकर भी स्वागत किया गया। खास बात यह रही कि मुस्लिम समाज के साथ अन्य धर्मों के लोगों ने भी कई स्थानों पर जुलूस का स्वागत किया। लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी और अमन-चैन की दुआ की। स्वागत के दौरान शहर की सामाजिक एकता और भाईचारे की तस्वीर दिखाई दी।
अखाड़े के करतब देख थम गई भीड़
मरकज सीरत कमेटी की देखरेख में निकले जुलूस में शमशाद अखाड़े के युवाओं ने पारंपरिक खेलों का प्रदर्शन किया। तलवारबाजी, लाठी और अन्य करतबों ने लोगों का ध्यान खींचा। रास्ते में करतब देखने के लिए भीड़ जुटती रही। युवाओं के प्रदर्शन पर लोगों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया।जुलूस में बच्चे, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल रहे। छोटे बच्चे हाथों में हरे झंडे लेकर चलते नजर आए, जबकि युवा नात-ए-पाक और सलाम पेश करते रहे। पूरे रास्ते नात और नारों की गूंज सुनाई देती रही।
पुलिस की निगरानी में शांतिपूर्वक संपन्न हुआ आयोजन
जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। जुलूस मार्ग पर पुलिस बल के साथ महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती रही। यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए वाहनों को जरूरत के अनुसार वैकल्पिक मार्गों से निकाला गया। पुलिस अधिकारी लगातार जुलूस मार्ग पर निगरानी करते रहे और भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए पुलिसकर्मियों को दिशा-निर्देश देते रहे। सुरक्षा व्यवस्था के बीच जुलूस शांतिपूर्वक किला मैदान पहुंचा। 12 रबीउल अव्वल पर निकला जुलूस-ए-मोहम्मदिया धार्मिक आस्था के साथ मोहब्बत, अमन और भाईचारे का संदेश देता नजर आया। अकीदतमंदों ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब की जिंदगी इंसानियत, आपसी प्रेम और जरूरतमंदों की मदद की सीख देती है। शहर में निकले जुलूस के दौरान भी यही संदेश प्रमुखता से दिखाई दिया।
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